Real Life Inspirational Story: दिहाड़ी मजदूरी करने वाली मां और परचूनी की दुकान चलाने वाले पिता के बेटे ने मेहनत और लगन के दम पर नई मिसाल कायम कर दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया।
International Champion Tofiq Ahmed: दिहाड़ी मजदूर मां और गांव में परचूनी की दुकान संचालित कर रहे पिता के होनहार ने गांव की कच्ची गलियों से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक का सफर तय किया है। उसने प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते हैं।
रसूलपुरा निवासी तोफीक अहमद (17) ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेल को सपना बनाया और मेहनत के बल पर सच कर दिखाया। केन्द्रीय विद्यालय वन में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत तोफीक की खेल प्रतिभा निखारने में कोच शारीरिक शिक्षक मनोज कुमार बैरवा ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
कक्षा 8वीं में अध्ययन के दौरान तोफीक की खेल प्रतिभा देख शारीरिक शिक्षक बैरवा उसे तराशने में जुटे गए। उसे मुक्केबाजी का प्रशिक्षण देना शुरू किया, लेकिन दादी ने चोट लगने का जोखिम बताते हुए इस खेल से दूरी बनाने को कहा। इस पर कोच ने तोफीक को रनिंग व गोला फेंक के लिए प्रशिक्षित किया। कोचिंग और अभ्यास के तालमेल से वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचा।
जून 2024 में नेपाल के पोखरा रंगशाला स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में तोफीक ने गोला फेंक (शॉट पुट) में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। उसके ताऊजी मोहम्मद इकबाल खान कबड्डी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं, जिनसे प्रेरणा लेकर उसने मैदान में खुद को साबित करने का संकल्प किया।
पिता सिराज मोहम्मद के अनुसार तोफीक ने जुलाई 2025 में आगरा में 54वीं केन्द्रीय विद्यालय संगठन राष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर मुक्केबाजी के अंडर-17 वर्ग में रजत पदक जीता। केन्द्रीय विद्यालय संगठन की रीजनल प्रतियोगिता में 400 मीटर दौड़ एवं गोला फेंक में रजत पदक हासिल किए।
वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के झांसी में हुई राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। वर्ष 2023 में अजमेर जिला ओपन प्रतियोगिता के गोला फेंक में स्वर्ण पदक जीता। अंडर-14 ओपन प्रतियोगिता में कोटा में 60 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
तोफीक की माताजी अनीसा परवीन वीबी जीरामजी ‘मनरेगा’ योजना में श्रमिक हैं और दिहाड़ी मजदूरी करती हैं। बड़ी बहन शगुफ्ता परवीन बीएड कर रही हैं। ‘निर्माण श्रमिक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता प्रोत्साहन योजना’ में उनके आवेदन पर सरकार की ओर से 11 लाख की राशि प्रदान की गई।
इस योजना में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिस्सा लेने वाले पंजीकृत श्रमिकों या उनके बच्चों को 2 लाख वित्तीय सहायता, स्वर्ण पदक जीतने पर 11 लाख, रजत पर 8 लाख और कांस्य पदक जीतने पर 5 लाख का प्रोत्साहन मिलता है।