- पीएम मोदी ने संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर की थी तकनीक की सराहना जलकुंभी से कंपोस्ट खाद बनाने के साथ ही एक और नवाचार किया जाएगा। नित नई आ रही तकनीक के चलते अब जलकुंभी से कागज भी बनाया जा सकेगा। नगर निगम प्रशासन आने वाले दिनों में इसके लिए एजेंसियों से संपर्क साधेगा।
अजमेर. जलकुंभी से कंपोस्ट खाद बनाने के साथ ही एक और नवाचार किया जाएगा। नित नई आ रही तकनीक के चलते अब जलकुंभी से कागज भी बनाया जा सकेगा। नगर निगम प्रशासन आने वाले दिनों में इसके लिए एजेंसियों से संपर्क साधेगा। यदि बात आगे बढ़ी तो आनासागर और बांडी नदी से निकाली जाने वाली जलकुंभी कागज निर्माण प्रक्रिया में उपयोग होकर निगम के लिए आय का जरिया भी बन जाएगी।झीलों को संरक्षित करने के लिए उनमें उगने वाले पादप, कवक व जलकुंभी या वाटर हाईसिंथ आदि को साफ कर व इसकी वृदि्ध रोकने के लिए इससे कागज बनाया जाएगा। इसके लिए इन्हें मैश या क्रश करने के बाद लिक्विड को प्रेस कर कागज की शीट के रूप में विकसित किए जाने की तकनीक पर अध्ययन किया जाएगा।
पीएम मोदी कर चुके हैं तकनीक की प्रशंसादिल्ली में हाल ही नए संसद भवन में इस तकनीक की पीएम मोदी ने प्रशंसा की थी। इसे देश की विभिन्न झीलों में उगने वाली जलकुंभी पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
पिछले एक पखवाड़े में 75 प्रतिशत जलकुंभी साफ- एक पखवाड़े में झील से 150 डंपर जलकुंभी निकाली
- कम गहराई वाले क्षेत्र में नावों एवं श्रमिकों से हो रहा कामतैयार होगी खाद
सोलिड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट ( एसएलआरएम ) के तहत सूखे पत्तों एवं जलकुंभी से45 से 60 दिन में कम्पोस्ट बेड में खाद तैयार होगी।
इनका कहना हैजलकुंभी से कागज बनाने की तकनीक की जानकारी मिली है। निगम प्रशासन संबंधित एजेंसी से संपर्क कर अजमेर में भी जलकुंभी से कागज बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
ब्रजलता हाड़ा, महापौर, नगर निगम अजमेर