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रक्तिम तिवारी/अजमेर.
प्रदेश के युवाओं को नए और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों की जरूरत है। वहीं तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थाएं इसमें पीछे है। उन्हें स्किल इंडिया से मतलब नहीं है। तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थाओं का कई रोजगारोन्मुखी और कौशल विकास पाठ्यक्रमों से दूर रहना इसका परिचायक है। सरकारी कॉलेज में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के कुछ उद्यमिता एवं कौशल विकास कोर्स शुरू हुए हैं,पर प्रवेश की रफ्तार बहुत धीमी है। रोजगार की अच्छे अवसरों के बावजूद संस्थानों में पारम्परिक कोर्स ही संचालित हैं।
प्रदेश में 20 से ज्यादा सरकारी और निजी विश्वविद्यालय हैं। इनके अलावा सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में करीब 50 हजार सीट हैं। सरकारी और निजी पॉलेटेक्निक कॉलेज में डिप्लोमा इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की 49 हजार 921 सीट हैं। इनमें सरकारी कॉलेज में करीब 4 हजार 566 और निजी कॉलेज में 45 हजार 355 सीट हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के 200 से ज्यादा सरकारी और 150 से ज्यादा निजी कॉलेज हैं। इनमें भी करीब 1.50 लाख विद्यार्थी पढ़ते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज में राजस्थान इंजीनियरिंग एडमिशन प्रोसेस से प्रवेश होते हैं। वहीं पॉलीटेक्निक कॉलेज, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में दसवीं/बारहवीं/स्नातक कक्षाओं के प्राप्तांकों के आधार विभिन्न कोर्स में प्रवेश होते हैं।
नई ब्रांच-कोर्स की शुरुआत में पीछे
पॉलीटेक्कि, इंजीनियरिंग कॉलेज, विश्वविद्यालयों और अन्य कॉलेज में कई रोजगारोन्मुखी एवं कौशल विकास पाठ्यक्रमों की कमी है। इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेज में तकनीकी शिक्षा विभाग की मांग के अनुरूप नए कोर्स-ब्रांच खोलने में पीछे है। उच्च शिक्षा विभाग के अधीनस्थ सरकारी कॉलेज में हाल में इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू किया है। यहां उद्यमिता और कौशल विभाग कोर्स प्रारंभ हुए हैं, लेकिन विद्यार्थियों की दाखिलों में रुचि कम है।
इन विशिष्ट कोर्स का अभाव
ग्रीन केमिस्ट्री, थियेयर एन्ड आर्ट, नैनो टेक्नोलॉजी, सोलर एनर्जी, एन्वायरमेंट इन्फॉरमेटिक्स, कॉमर्शियल प्रेक्टिस, कम्प्यूटर एप्लीकेशन एन्ड बिजनेस मैनेजमेंट, इंस्ट्रूमेंट टेक्नोलॉजी, एप्लाइड इलेक्ट्रानिक्स, इंश्योरेंस एन्ड कॉमर्स, मिलिट्री साइंस, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी, कम्प्यूटर इंजीनियरिंग टूल एन्ड डाई, प्रोस्थेटिक्स एन्ड ऑर्थेटिक्स, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी, मेटेलर्जिकल इंजीनियरिंग, सैंडविच मेकेनिक्स, पॉलीमर टेक्नोलॉजी और अन्य
राजस्थान में इन्हीं कोर्स पर जोर
कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के पारम्परिक कोर्स, सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन कंट्रोल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंस्ट्रूमेंटेशन, कम्प्यूटर, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, पेट्रो केमिकल, प्रोडक्शन इंडस्ट्री, पर्यावरण विज्ञान, खाद्य एवं पोषण, सांख्यिकी और अन्य कोर्स।
दूसरे प्रदेशों में जाते हैं विद्यार्थी
तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों में रोजगारोन्मुखी, उद्यमिता-कौशल कोर्स, लघु अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स नहीं होने से प्रतिवर्ष हजारों विद्यार्थी दूसरे राज्यों में पलायन कर जाते हैं। बीते 15-20 वर्षों में यहां कई सरकारी और निजी कॉलेज खुले हैं। मांग के अनुरूप नई ब्रांच और कोर्स और भी शुरू हुए हैं, फिर भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में यह संख्या सीमित है। विद्यार्थियों को पास चिरपरिचित ब्रांच और कोर्स में ही दाखिलों का विकल्प मिलता है।
संस्थाओं में शिक्षकों की कमी
यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक सहित उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इंजीनियरिंग कॉलेज तो बगैर एक्रिडेशन और प्रोफेसर के संचालित हैं। पॉलीटेक्निक कॉलेज में भी ब्रांचवार शिक्षक कम हैं। उच्च और तकनीकी विश्वविद्यालयों के लिए नैक और नैब (नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन) से ग्रेडिंग जरूरी है, लेकिन संस्थाओं की इसमें रुचि नहीं है। मदस विश्वविद्यालय तो महज 18 शिक्षकों के भरोसे संचालित है। कॉलेज शिक्षा निदेशालय के अधीन लॉ और नए खुले कॉलेज में भी कम शिक्षक हैं।