
भारत एवं ऑस्ट्रेलिया के बीच रविवार को होने वाला वन-डे क्रिकेट का खिताबी मुकाबला देखने के लिए शहरवासियों में भी खासा जोश है। लोगों ने मैच देखने के लिए घरों में विशेष तैयारियां की हैं। ड्रॉइंग रूम व लॉबी में बड़ी एलईडी लगाकर मैच देखने के इंतजाम किए जा रहे हैं। दिनभर का शेड्यूल मैच के मुताबिक तय किया है। शहर के कई होटल की रूफटॉप पर व रेस्टोरेंट आदि तक में बड़ी स्क्रीन पर फाइनल मुकाबले को देखने-दिखाने की तैयारियां की गई हैं।
तब जोहान्सबर्ग में खेला गया था फाइनल
2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में विश्व कप का फाइनल जोहान्सबर्ग में खेला गया था। तब भारत 10 में से 7 मैच जीता था परंतु इस बार भारत ने 10 मैच बिना कोई मैच हारे जीते हैं।40 साल पहले कुछ और थे नियम
1983 और 2023 में कोई पावर प्ले नहीं होता था। मैच कम स्कोरिंग के हुआ करते थे। सुरक्षा उपकरण कम होते थे। जबकि अब नए नियमों से क्रिकेट का रोमांच चरम पर है।
तब दूसरी जगह जाकर देखते थे मैच
अस्सी के दशक में गिने-चुने लोगों के यहां रंगीन टीवी होने से उन्हीं के घरों पर जाकर मैच देखने का जुगाड़ किया जाता था। कॉलोनी में लोग एक टेलीविजन के सामने बैठकर मैच देखा करते थे। कितनी बार छत पर जाकर नेटवर्क के लिए एंटीना एडजस्ट करना पड़ता था जो अब किस्से-कहानी हो चले हैं।इनका कहना है
फाइनल मुकाबलाें में भारत के पहुंचने के बाद भावनात्मक जुड़ाव का उदाहरण किसी अन्य देश में इतना नहीं होता जितना हमारे देश में होता है। लोगों ने धार्मिक अनुष्ठान शुरू कर दिए हैं। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। अब लोग घरों में आनंदपूर्वक बड़ी स्क्रीन पर मैच का लुत्फ उठाने को तैयार हैं।अतुल दुबे
टेबल-टेनिस अंपायरक्रिकेट का क्रेज भारत में बढा है, तकनीक और उन्नत हुई है। इंप्रोवाइज क्रिकेट देखने को मिलने लगा है। इस बार भारत की स्थिति बहुत अच्छी है। हर भारतवासी टीम इंडिया की जीत कामना कर रहा है।
डॉ गजराज सिंह राठौड़
शारीरिक शिक्षक