
Pushkar Drowning Incident: सोमवती अमावस्या पर पुण्य स्नान के लिए बालोतरा जिले के समदड़ी से मां के साथ पुष्कर आया 8वीं कक्षा का छात्र मोती अब कभी घर नहीं लौट सकेगा। मां पवनी कुमारी बेटे के साथ सरोवर में स्नान कर रही थी कि अचानक वह गहरे पानी में चला गया। कुछ ही पलों में खुशियों से भरा धार्मिक सफर मातम में बदल सिविल गया। डिफेंस जवानों ने उसे पानी से निकालकर सीपीआर दिया और जेएलएन अस्पताल पहुंचाया, लेकिन मोती जिंदगी की जंग हार गया।
पुलिस के अनुसार समदड़ी निवासी पवनी बेटे सवाई व मोती समेत 10-12 ग्रामीणों के साथ सोमवती अमावस्या पर पुष्कर स्नान के लिए आई थी। सुबह सरोवर में स्नान के दौरान मोती अनजाने में गहरे पानी की और बढ़ गया। कुछ ही क्षणों में वह पानी में डूब गया। सरोवर किनारे मौजूद श्रद्धालुओं के बीच अफरा-तफरी मच गई और मां की चीख-पुकार ने माहौल को गमगीन कर दिया।
पुष्कर सरोवर पर तैनात सिविल डिफेन्स के जवान किशनलाल जाट व उनकी टीम ने तत्काल पानी में छलांग लगाई। कुछ मिनटों की तलाश के बाद मोती को बाहर निकाल लिया। जवानों ने उसके शरीर से पानी निकाल सीपीआर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शरीर में हलचल दिखाई देने पर उम्मीद जगी और उसे तुरंत जवाहरलाल नेहरू अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने करीब 4 घंटे तक उपचार किया लेकिन दोपहर 12.30 बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
छोटे बेटे की मौत के बाद मां पवनी कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल के गलियारों में वह बार-बार बेटे का नाम लेकर बिलखती रही। जिस बेटे के साथ यह धार्मिक स्नान के लिए आई थी, उसी का शव लेकर उसे घर लौटना पड़ा।
मृतक मोती के नाना पुखराज लखारा ने बताया कि बेटी पवनी कुमारी पिछले कुछ साल से अकेले ही दोनों बेटों का पालन-पोषण कर रही थी। पारिवारिक विवाद के बाद पति से अलगाव हो गया। इसके बाद उसने समदड़ी में रहकर बच्चों की परवरिश की।
सिविल डिफेस टीम के सुनील सोनी सुरेन्द्र शर्मा, महासिंह, राधेश्याम माली, महेद्र भारद्वाज ने पुष्कर सरोवर के घाटों पर सेवाएं दी। जहां गऊ घाल पर 7 साल के बच्चे को डूबने से बचाया। वहीं नागौर जिले के मोहरा गांव के 14 वर्षीय गुंजन, वराह यात्र पर बीकानेर निवासी 36 वर्षी इन्दरदास, पालड़ी निवास कमलादेवी व संतोषदेवी को डूबने बचाया। शाम तक घाटों पर 16 यात्रियों को डूबने से बचा चुके हैं।