
अजमेर। राजस्थान के किसानों को वित्त वर्ष 2023-24 से फसल बीमा योजना में करीब 8 हजार 7 सौ करोड़ का क्लेम मिला है। इस दौरान कंपनियों को अकेले राजस्थान से 11 करोड़ से ज्यादा क्लेम आवेदन मिले। इनके निस्तारण में 8 हजार 6 सौ करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। हालांकि इनमें से करीब 8 करोड़ दावे लंबित है। वहीं किसानों से करीब 2 हजार 9 सौ 88 करोड़ रुपए प्रीमियम प्राप्त हुआ। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा को लेकर दिए जवाब में यह बात सामने आई है। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना भी शामिल है। मिजोरम ऐसा राज्य है। जहां क्लेम भुगतान शून्य है।
मंत्रालय की ओर से वित्त वर्ष 2023-24 से जुलाई 2026 तक किसानों से 10 हजार 662 करोड़ रुपए का प्रीमियम प्राप्त किया गया। इसके बदले 46 हजार करोड़ रुपए का भुगतान दावों के रूप में किया गया। इस अवधि में सरकार को करीब साढ़े 43 करोड़ दावे प्राप्त हुए। दावों की राशि के भुगतान में महाराष्ट्र अव्वल है। वहीं राजस्थान दूसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र में जहां 5 करोड़ 72 लाख से ज्यादा दावे प्राप्त हुए।
इनके बदले 17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया। प्रीमियम कलेक्शन 1 हजार 94 करोड़ रहा। वहीं राजस्थान दूसरे नंबर पर है। यहां 8 हजार 697 करोड़ रुपए का भुगतान किया। वहीं राजस्थान में दावों की संख्या 11 करोड़ रही। इसके बदले करीब 8 सौ करोड़ रुपए का भुगतान ही लंबित है। तीसरे नंबर पर कर्नाटक है। यहां 2023-24 से एक करोड़ 4 लाख दावों पर 7 हजार 643 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया। प्रदेश से 1 हजार 2 सौ 74 करोड़ से ज्यादा का प्रीमियम प्राप्त हुआ।
दावों की पेंडेंसी में आंध्र प्रदेश आगे है। आंध्र प्रदेश में 2 करोड़ 44 दावों के एवज में 362 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान किया। यहां 27 सौ करोड़ रुपए के दावे पेंडिंग है। यह पेंडेंसी की सबसे बड़ी रकम है। दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा रकम राजस्थान की है। अंडमान निकोबार व मिजोरम की पेंडेंसी शून्य है।
हाल ही में राजस्थान में फर्जी तरीके से फसल बीमा क्लेम के मामले भी सामने आए थे। पुलिस में इस संबंध में नागौर जिले में गिरफ्तारियां भी की थी।
फसल बीमा को लेकर किसानों को खराबे की सूचना टोल फ्री 14447 नंबर पर देनी होती है। इसके बाद क्लेम के साथ स्वयं की सही जानकारी देनी बहुत जरूरी है। फॉर्म में फसल का नाम, बैंक खाते की जानकारी, फसल का प्रकार रबी या खरीफ, मोबाइल नंबर और फसल के नुकसान की सही जानकारी देनी होती है। इसके साथ ही फोटो, आधार कार्ड और जमीन के दस्तावेज जमा कराने होते हैं। कई बार दस्तावेजों की कमी, गलत बैंक खाता आदि कारणों के चलते क्लेम पेंडिंग हो जाता है।