
पुष्कर के नए मेला मैदान में रैतीलें धोरों का सीना चीर कर बनाई जा रही कंकटरी पत्थरों की सड़क ।
Pushkar Mela 2026 पुष्कर। दस नवंबर से शुरु होने वाले पुष्कर मेले के लिए एक सप्ताह पूर्व से ही मेला मैदान में ऊंटों आमद होने लगी है। ऊंटपालकों ने सावित्री पहाडी की तलहटी में तम्बू गाडने शुरू कर दिए हैं। अंधेरे धोरों में मेला शुरू होने का इंतजार कर रहे ऊंट पालकों को पेयजल व रोशनी की दरकार है।
मेला मैदान में मनोरंजन के साधन भी लगने शुरू हो गए हैं। पुष्कर पशु मेला दीपावली के अगले दिन दस नवम्बर से शुरू होकर पूर्णिमा तिथि 26 नवम्बर तक चलेगा। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर पशु मेले की शुरुआत कार्तिक शुक्ला अष्टमी 17 नवम्बर को ध्वजारोहण के साथ की जाएगी।
पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के प्रवेश मार्गों पर 12 नवम्बर से चौकियाें की स्थापना कर दी जाएगी। लेकिन इसी बीच इन दिनों मेला मैदान क्षेत्र में पथरीली सड़क बनाई जाकर धोरों का स्वरूप बिगाड़ने को लेकर प्रशासनिक कामकाज पर अंगुली उठने लगी हैं।
नए मेला मैदान में बागेश्वर धाम की कथा के लिए रेतीले धोरों का स्वरूप बिगड़ने का हवाला देते हुए सशर्त अनुमति देने वाले जिला प्रशासन ने अब खुद की धोरों का प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़ना शुरु कर दिया है। क्षेत्र में कंकरीट, बरडा व पत्थर डालकर पक्की सड़कें बनाई जा रही हैं।
पुष्कर के रेतीले धोरों का स्वरूप बिगडने लगा है। अश्वपालकों के लिए बनाई जा रही सडक से ऊंटों का सड़क पर चलना दूभर हो रहा है। मेला मैदान में कपालेश्वर महादेव मंदिर के आसपास के इलाके में झूले चकरी सहित मनोरंजन के साधन भी लगने शुरु हो गए हैं।
नए मेला मैदान की राजस्व भूमि पर्यटन विभाग काे आवंटित की जा चुकी है। किसी भी आयोजन से पूर्व पर्यटन विभाग की अनापत्ति लेने के बाद पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों से अलग से अनुमति ली जाती है। बागेश्वर धाम कथा के लिए यही किया गया था। एसपी व जिला कलक्टर ने मौका देखने के बाद धोरों का स्वरूप यथावत रखने की सशर्त अनुमति दी थी। लेकिन हालिया मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
पुष्कर पशु मेले के लिए स्वयं प्रशासनिक अधिकारी बरडा, पत्थर बिछाकर करीब दो किलोमीटर लम्बी सडक बनाकर धोरों का प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़ रहे हैं। धोरों में अश्व पालकों को भूंखड आवंटन के बाद ऊंट पालकों को भी ऊंटों के साथ इसी पथरीली सडक से गुजरना होगा।ऊंटों के गद्दीदार पैरों के लिए पथरीली सड़क बड़ी यातना से कम नहीं होगी।
सड़क निर्माण के लिए जानकारी चाहने पर मेला मजिस्ट्रेट गुरुप्रसाद तंवर ने जमीन पर्यटन विभाग की बता दी। वहीं पर्यटन विभाग के अधिकारी ने एडीए की ओर से सडक बनाना स्वीकार करते हुए इसे सरकारी निर्णय बताकर धोरों के बिगडते स्वरूप के मामले में अक्षमता जताई।
नए मेला मैदान की जमीन पर्यटन विभाग को आवंटित है। रेवेन्यू लैण्ड नहीं है। मेरी जानकारी के अनुसार मैदान में सडक एडीए बना रहा है। वे ही जवाब दे सकते हैं।
मेला मैदान में सडक एडीए बनवा रहा है। मैं मेला मैदान की यथास्थिति बनाए रखने का प्रयास करुंगा लेकिन सरकार के हाई लेवल के निर्णय सभी को मानने होते हैं।
Updated on:
3 Nov 2026, 12:15 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 12:15 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.