
मनीष कुमार सिंह
बलात्कार पीड़िता मासूम बालिका को पहले दरिंदों ने हवस का शिकार बनाया, फिर उसे ना केवल घर, समाज बल्कि स्कूल में भी बिसरा दिया गया। जहां उसे स्कूल में शिक्षिकाओं से सहानुभूति मिलनी चाहिए थी। वहीं उसे स्कूल का नाम, माहौल खराब होने का डर दिखा ‘परीक्षा का प्रवेश पत्र आएगा, तब तुझे बुला लेंगे, अब तुझे आने की जरूरत नहीं है’ कह कर लौटा दिया गया। स्कूल प्रबंधन ने इतने पर भी बस नहीं किया, बल्कि अनुपस्थित दिखाकर ना केवल नाम काट दिया बल्कि परीक्षा देने से वंचित भी कर दिया।
पीड़िता ने बाल कल्याण समिति को बताया कि उसके माता-पिता ने भी स्कूल प्रबंधन से मिन्नतें की लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। जबकि वह अक्टूबर 2023 तक की स्कूल फीस और 12वीं बोर्ड परीक्षा का फार्म और फीस भर चुकी थी।
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नहीं दे सकेगी परीक्षा
पीड़िता ने बाल कल्याण समिति को बताया कि दिसम्बर में स्कूल में सम्पर्क किया तो नाम काट दिया जाना बताया। उसे स्कूल की तरफ से ना तो बोर्ड परीक्षा का प्रवेश पत्र दिया गया, ना नाम काटने की सूचना दी। जिससे पीड़िता इस वर्ष परीक्षा नहीं दे सकेगी। वह फिर से स्कूल में दाखिला चाहती है। ताकि उसकी पढ़ाई फिर से शुरू हो सके।
बालिका को उसका हक दिलाया जाएगा
प्रकरण में प्रारंभिक पड़ताल में निजी विद्यालय का गैरजिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने पीड़िता को सहारा देने के बजाए अपराध को बढ़ाने का काम किया है। प्रकरण में जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। बालिका को शिक्षा का अधिकार है। उसको उसका हक दिलवाया जाएगा। अंजली शर्मा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति
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स्कूल का नाम खराब होने का तर्क
अजमेर के गेगल थाना क्षेत्र निवासी 12वीं कक्षा की छात्रा के साथ अक्टूबर 2023 में उसके चाचा समेत तीन जनों ने बलात्कार किया था। पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया। घटना के दो दिन बाद पीड़िता स्कूल पहुंची तो स्कूल की प्रिंसिपल व शिक्षिका ने उसे स्कूल आने से मना कर दिया। कारण पूछने पर स्कूल का माहौल, नाम खराब होने का तर्क दिया। वहीं स्कूलप्रशासन ने बोर्ड परीक्षा का प्रवेश पत्र आने पर सूचना देने की बात कही।