अजमेर

कॅरियर के लिए खास है यह कोर्स, शुरुआत हो जाए क्या कहने….

www.patrika.com/rajasthan-news
less than 1 minute read
• •
Updated: 7 Feb 2019, 6:33 AM IST
five year llb course
five year llb course

अजमेर. सरकारी और निजी कॉलेज में विद्यार्थियों को 5 वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम का इंतजार है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की एकेडेमिक कौंसिल इसे मंजूरी दे चुकी है। लेकिन सिलेबस नहीं बनने से कोर्स की शुरुआत में विलंब हो रहा है।

विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा और नागौर जिले के कॉलेज शामिल हैं। ज्यादातर कॉलेज में कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के पारम्परिक पाठ्यक्रम ही संचालित हैं। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, एबीएसटी, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, ईएएफएम और अन्य कोर्स शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने बीते साल जून में आयोजित विद्या परिषद की बैठक में पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम को मंजूरी प्रदान की। इसके तहत बीए, बीएससी और बी.कॉम एलएलबी पाठ्यक्रम चलाए जाने हैं।

सिलेबस नहीं हुआ तैयार
विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम तो मंजूर कर दिया लेकिन इसका सिलेबस सात महीने में भी नहीं बन पाया है। केवल बीए, बी.कॉम, बीएससी स्तर पर विधि संकाय से जुड़े पेपर के नाम तय हुए हैं। नागौर जिले के एक-दो कॉलेज ने पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम चलाने की पेशकश की, पर सिलेबस नहीं होने से उन्हें मंजूरी नहीं मिली है।

सत्र 2019-20 से शुरुआत!
पहल विश्वविद्यालय मौजूदा सत्र में पाठ्यक्रम चलाना चाहता था। सिलेबस नहीं बनने से अब यह सत्र 2019-20 से ही प्रारंभ हो सकता है। इसके अलावा लॉ और अन्य सरकारी कॉलेज में पाठ्यक्रम संचालन के लिए उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजना पड़ेगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही सरकारी कॉलेज में पाठ्यक्रम शुरू हो सकता है।

यह हैं रोजगार के लिए क्षेत्र
-विधि सलाहकार अथवा विधि परामर्शी-कॉरपॉरेट क्षेत्र
-बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में रोजगार
-श्रम एवं नियोजन विभाग
-न्यायिक क्षेत्र-सरकारी अथवा निजी प्रेक्टिस

Published on: