अजमेर

Ajmer Teacher Story: बच्चे को ‘जूठन’ खाते देख पिघला दिल, गरीबों को पढ़ाकर तैयार कर दिए डॉक्टर-टेक्नोक्रेट

एक बच्चे को जूठन खाते देखकर शिक्षक सुनील जोस ने गरीब बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया। तीन बच्चों से शुरू हुई मुहिम आज करीब 900 बच्चों तक पहुंच चुकी है। पुरानी बस को क्लासरूम बनाकर वे उन बस्तियों तक शिक्षा पहुंचा रहे हैं, जहां स्कूल तक पहुंचना भी बच्चों के लिए चुनौती है।
2 min read
Sep 04, 2026
teacher sunil jose
Ajmer: बच्चों को बस वाले क्लासरूम में पढ़ाते शिक्षक सुनील जोस (फोटो-पत्रिका)

अजमेर। एक बच्चे को जूठन खाते देख शिक्षक सुनील जोस का दिल पसीज गया। उसी पल उन्होंने तय कर लिया कि जिन बच्चों के पास पढ़ने के लिए स्कूल और खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है, उनके जीवन को शिक्षा के जरिए बदला जाएगा। यह संकल्प धीरे-धीरे ऐसी मुहिम में बदल गया, जिसने सैकड़ों गरीब और वंचित बच्चों की जिंदगी की दिशा बदल दी। आज जोस के पढ़ाए कई बच्चे डॉक्टर और टेक्नोक्रेट बनकर अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं।

शिक्षक सुनील जोस झुग्गी-झोंपड़ियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं। बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए उन्होंने करीब तीन लाख रुपए खर्च कर एक पुरानी बस खरीदी और उसे चलता-फिरता क्लासरूम बना दिया। अब यह बस उन इलाकों तक पहुंचती है, जहां आर्थिक तंगी के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते।

एक बच्चे को जूठन खाते देखा और बदल गई जिंदगी

सुनील जोस बताते हैं कि एक बार वे शादी समारोह में गए थे। वहां उन्होंने एक बच्चे को जूठन खाते देखा। यह दृश्य उनके मन में घर कर गया। उन्होंने उसी समय गरीब बच्चों के लिए कुछ करने और उन्हें पढ़ाने का संकल्प लिया। शुरुआत में उन्होंने कालबेलिया, भोपा और नाथ समाज के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाना शुरू किया।

शुरुआत महज तीन बच्चों से हुई थी। इसके बाद अभियान लगातार बढ़ता गया और अब करीब 900 बच्चे इससे जुड़ चुके हैं। जोस अपने सहयोगी शिक्षकों के साथ कोटड़ा, पंचशील सहित विभिन्न इलाकों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं।

डॉक्टर और टेक्नोक्रेट बने जरूरतमंद बच्चे

जोस की मेहनत का असर बच्चों के परिणामों में भी दिखाई देता है। उनके पढ़ाए कई जरूरतमंद बच्चे आइआइटी और मेडिकल कॉलेज तक पहुंच चुके हैं। एक कोचिंग संस्थान भी उनके माध्यम से भेजे गए करीब 190 बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध करा रहा है।

शिक्षा के साथ बच्चों के भोजन का भी इंतजाम किया जाता है। दानदाताओं के सहयोग से जरूरतमंद बच्चों को दोनों वक्त का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि भूख उनकी पढ़ाई में बाधा न बने।

अच्छे नागरिक बनाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य

सुनील जोस का कहना है कि उन्हें अपने लिए कुछ नहीं चाहिए। उनकी सबसे बड़ी इच्छा है कि गरीब और वंचित बच्चों को पढ़ा-लिखाकर आत्मनिर्भर और अच्छा नागरिक बनाया जाए। उनका मानना है कि प्रतिभा किसी वर्ग या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर वंचित वर्ग के बच्चे भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं।

अब मॉडल स्कूल बनाने का सपना

जोस अब गरीब और पिछड़े बच्चों के लिए एक मॉडल स्कूल तैयार करना चाहते हैं। उनका प्रयास है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ ऐसा वातावरण मिले, जहां वे अपने सपनों को उड़ान दे सकें। चलता-फिरता स्कूल शुरू करने से लेकर बच्चों को आइआइटी और मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने की उनकी यात्रा शिक्षा की ताकत और एक शिक्षक के समर्पण की मिसाल बन गई है।

यह वीडियो भी देखें :

Updated on:
04 Sept 2026 04:04 pm
Published on:
04 Sept 2026 04:04 pm