अजमेर के संदीप त्रिवेदी ने तकनीक और सेवा से आसान किया जीवन, रिकॉर्डिंग क्लब की स्थापना कर हजारों दृष्टिबाधितों काे किया लाभान्वित
दिनेश कुमार शर्मा
अजमेर (Ajme rnews). संदीप कुमार त्रिवेदी (42) जब मात्र तीन साल के थे, तब बाल मोतिया और बाद में ग्लूकोमा के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। उन्होंने इस अंधेरे को अपनी ताकत बना लिया। आज वे खुद भले ही देख नहीं सकते, लेकिन हजारों दृष्टिबाधितों के जीवन में ‘उजियारा’ ला चुके हैं। अजमेर में नसीराबाद रोड स्थित खनिजनगर निवासी संदीप के पिता विजय त्रिवेदी चिकित्सा विभाग से सेवानिवृत्त और माता हेमलता गृहिणी हैं। पत्नी वंदना और बेटी प्रशस्ति के साथ उनका छोटा-सा परिवार है, लेकिन उनके कामों का दायरा पूरे देश तक फैला हुआ है।
संदीप ने स्कूली शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक अंध विद्यालय से प्राप्त की। उन्होंने एसपीसी-जीसीए से एमए फिर बीएड किया। वर्ष 2011 में शिक्षा विभाग में सैकंड ग्रेड शिक्षक के रूप में नियुक्ति मिली। वर्तमान में वे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आदर्शनगर में प्रधानाचार्य पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बांसुरी वादन में प्रथम और अंग्रेजी ब्रेल वाचन प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। कॉलेज के दौरान सामूहिक गायन में राज्य स्तर पर प्रथम पुरस्कार जीता। वर्ष 2006 में पाकिस्तान में आयोजित भारत-पाक ब्लाइंड क्रिकेट सीरीज में बतौर ऑलराउंडर हिस्सा लिया।
वर्ष 2010 के आस-पास दृष्टिबाधित छात्र कैसेट के माध्यम से पढ़ाई करते थे, तब सीमित रिकॉर्डिंग, रील का अटकना और विषय तक सीधे पहुंचने में कठिनाई होती थी, जबकि अन्य राज्यों में डिजिटल ‘डेजीरिकॉर्डिंग’ का उपयोग हो रहा था। संदीप ने इसे समझा, सीखा और खुद रिकॉर्डिंग शुरू की। 2011 में नौकरी लगने के बाद भी उन्होंने इस काम को जारी रखा। वर्ष 2016 में उनकी रिकॉर्डिंग की मांग देशभर से आने लगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ग्रुप बनाकर यह जानने की कोशिश की कि दृष्टिबाधितों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उनके सामने दृष्टिबाधितों के लिए समाचार पत्रों की अनुपलब्धता की समस्या सामने आई। समाचार सुनने के लिए वे दूसरों पर निर्भर थे। उन्होंने 20 मई 2016 को ‘राजस्थानपत्रिका’ के समाचारों की 20 मिनट का ऑडियो बुलेटिन तैयार की। यह प्रयास इतना सफल रहा कि उसी वर्ष ‘रिकॉर्डिंगक्लब’ संस्था की स्थापना कर दी गई। इस क्लब के माध्यम से हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाओं में अखबार, सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं की सामग्री और मनोरंजक कंटेंट ऑडियो रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। कोविडकाल में इन सेवाओं का दायरा और बढ़ा, जिससे न केवल दृष्टिबाधित बल्कि अन्य लोग भी लाभान्वित हुए।
संदीप ने दृष्टिबाधितों के लिए मोबाइल और कम्प्यूटर प्रशिक्षण ऑनलाइन शुरू किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने दृष्टिबाधितों के लिए ऑनलाइन विवाह परिचय सम्मेलन भी शुरू किया। अब तक 6 जोड़ों के विवाह करवा चुके हैं और 600 से अधिक लोगों की आपस में बातचीत करा चुके हैं। समाज के सहयोग से वे दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं, जहां रहने, खाने, इंटरनेट और कम्प्यूटर प्रशिक्षण की व्यवस्था है। वर्तमान में 20 छात्र-छात्राएं इसका लाभ ले रहे हैं। हर साल वे दृष्टिबाधित सशक्तीकरण सम्मेलन आयोजित करते हैं। ये देश के 9 बड़े शहरों में हो चुके हैं, जिनमें 2000 से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं।
संदीप कवि और मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं और रेडियो के जरिए अपनी आवाज लोगों तक पहुंचा रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने जवाहर रंगमंच में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी आयोजित किया। उनकी पहल से रिकॉर्डिंग क्लब की सामग्री का उपयोग कर कई युवा सरकारी नौकरियों में चयनित हो चुके हैं। कोविड के दौरान उन्होंने समाज के सहयोग से जरूरतमंद दृष्टिबाधितों की आर्थिक मदद भी की।