अजमेर

खतरनाक…भारत में बढ़ रहे हैं सुसाइड केस, जबरदस्त टेंशन में है देश के स्टूडेंट्स

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Sep 29, 2018
suicide case increase
suicide case increase

चन्द्र प्रकाश जोशी/अजमेर।

जीवन में मुश्किल से घबराने, अवसाद, तनाव के चलते व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है। इससे परिवार एवं समाज में नकारात्मक भाव बढ़ता है। मनोचिकित्सकों की मानें तो आत्महत्या की रोकथाम के लिए स्कूल, कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम आज की आवश्यकता है। अजमेर जिले में आत्महत्या के आंकड़े प्रतिवर्ष 120 तक पहुंच गए हैं, वहीं विश्व में यह आंकड़ा करीब 8 लाख है।

आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण के लिए समाज की जितनी भूमिका है उतनी ही सरकारों की भी है। आत्महत्या से नुकसान, परिवार एवं समाज को होने वाली क्षति के साथ किशोर, युवा एवं व्यक्तियों की मनोदशा को बदलने के लिए मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा बेहद जरूरी है।

असामयिक मौत के बढ़ते आंकड़े समाज एवं चिकित्सकों के लिए भी चिंता का कारण बने हुए हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार यह जानना आवश्यक है कि आत्महत्या की सोचने वाले व्यक्ति में किस तरह के बदलाव प्रारम्भिक तौर पर नजर आने लगते हैं। जिले में पिछले दो दिन में एक ने झील में कूदकर तो दूसरे ने पेड़ पर फांसी लगाकर ईहलीला समाप्त कर ली।

आंकड़ों की नजर में

8-10 आत्महत्या प्रतिमाह अजमेर में
10 से 12 आत्महत्या अजमेर में (अप्रेल से जून माह तक)

40 सैकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या (विश्व में)
8 लाख आत्महत्या प्रतिवर्ष विश्व में

11.4 प्रति एक लाख व्यक्ति आत्महत्या दर (विश्व की)

आत्महत्या के लिए उकसाने वाले कारण
- अवसाद, डिप्रेशन अत्यधिक तनाव

- सिजोप्रेनिया बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे मनोरोग
- मादक पदार्थों का अत्यधिक सेवन

- पारिवारिक या निजी रिश्तों में तनाव
- अत्यधिक आर्थिक हानि, असहनीय मानसिक व शारीरिक पीड़ा आत्महत्या की चेतावनी वाले संकेत

- गहरे अवसाद में रहना
- परिवार व अपने लोगों से कटना, अत्यधिक उदास, निराश रहना

- अत्यधिक थकान, नींद में कमी व खाने-पीने में अचानक कमी
- स्वयं के बारे में नकारात्मक, निराशावादी एवं हीनभावना से भरी बातें करना।

आत्महत्या की रोकथाम के लिए समन्वित कदम उठाने होंगे। हमारी चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में इस मुद्दे को गंभीरता और प्राथमिकता से शामिल करना होगा। स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को प्रमुखता से शामिल करना होगा। मानसिक रोग एवं अवसाद की सही समय पर पहचान तथा मनोचिकित्सकीय परामर्श व उपचार बहुत जरूरी है।

पार्थ मीणा, सहायक आचार्य मनोचिकित्सक

बढ़ता हुआ व्यक्तिवाद, आपसी संबंध कमजोर हो जाना, मानसिक तनाव रिलीज करने का व्यक्ति को अवसर नहीं मिलना है। अपेक्षा पूरी नहीं होना यह आत्महत्या के कारण हैं। इसमें पारिवारिक ढांचा, अभिभावक बच्चों पर बिजनेस व शिक्षा को लेकर अनावश्यक प्रेशर नहीं डालें। शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों का समावेश होना चाहिए, धर्म की ओर रुचि होनी चाहिए।

एल. डी. सोनी, प्रोफेसर एवं समाजशास्त्री, एसपीसी राजकीय महाविद्यालय

Published on:
29 Sept 2018 10:24 am