
अजमेर. प्रथम वर्ष के दाखिलों को लेकर लगातार 14 वें साल लॉ कॉलेज के वही हाल हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता और बार कौंसिल ऑफ इंडिया की मंजूरी के बिना दाखिले मुश्किल हैं। सरकार ने जल्द फैसला नहीं किया तो कॉलेज की मुसीबतें बढ़ेंगी।
लॉ कॉलेज को 13 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिली है। कॉलेज को प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता लेनी पड़ती है। बाद सम्बद्धता पत्र और निरीक्षण रिपोर्ट बार कौंसिल को भेजी जाती है। कौंसिल की मंजूरी के बाद प्रथम वर्ष में प्रवेश होते हैं। इस बार भी कमोबेश हालात वैसे ही हैं।
नहीं कर सकते दाखिले
बीसीआई को दी गई अंडर टेकिंग के अनुसार सरकार को अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता और स्टाफ और संसाधन जुटाने हैं। शर्तें पूरी किए बगैर सत्र 2108-19 में दाखिलों की मंजूरी नहीं मिलेगी। पिछले सत्र में इन्हीं कारणों से प्रवेश में विलम्ब हुआ था। संसाधन और शिक्षकों की कमीयूजीसी के नियमानुसार किसी भी विभाग में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित छह शिक्षक हैं। यहां का एक मंत्रालयिक कर्मचारी डेप्युटेशन पर जयपुर तैनात है। उसकी पगार कॉलेज से उठ रही है। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
तीन साल की सम्बद्धता पर पेच
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। यह मामला विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच अटका हुआ है। विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्तता छोडऩे को तैयार नहीं है। प्रस्ताव पर एकेडेमिक कौंसिल और प्रबंध मंडल में भी चर्चा नहीं हुई है।
इनका कहना है
प्रथम वर्ष दाखिलों के लिए बीसीआई की शर्त यथावत है। विश्वविद्यालय का सम्बद्धता पत्र मिलने के बाद ही कौंसिल को पत्र भेजकर प्रवेश की अनुमति ले सकते हैं।
डॉ. डी. के. सिंह कार्यवाहक प्राचार्य लॉ कॉलेज