अलीगढ़

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बदलने जा रहा 100 सालों का इतिहास, पहली बार हिन्दूओं को मिलेगी ताकत

उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ऐसा पहली बार होगा जब कोई महिला प्रोफेसर टीचर्स संघ के अध्यक्ष बनने जा रही है, साथ ही इसके पूरे इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब दो हिन्दू प्रोफेसर भी इसके सदस्य होंगे। टीचर्स संघ के चुनाव के लिए वोटिंग गुरुवार को कराई जाएगी।  

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Sep 14, 2022
Aligarh Muslim University

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इन दिनों टीचर्स संघ के चुनाव हो रहे हैं। जहां पहली बार कोई महिला शिक्षक अध्यक्ष बनने जा रही है, ऐसा इस विश्व विद्यालय के इतिहास में पहली बार एक महिला प्रोफेसर बतौर अध्यक्ष काम करेगी। इतिहास विभाग की प्रोफेसर चांदनी बी टीचर्स एसोसिएशन की निर्विरोध अध्यक्ष चुनी जाएंगी, क्योंकि इनकी खिलाफत करने के लिए फिलहाल अभी तक कोई भी खड़ा नहीं हुआ है। इसके अलावा ये इसलिए भी महतावपूर्ण है क्योंकि सौ साल के इतिहास में पहली बार हिंदू समुदाय के दो शिक्षक भी टीचर्स एसोसिएशन के सदस्य चुने जा रहे हैं।

आपको बताते चलें कि, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन का चुनाव गुरवार को होना तय हुआ है। जिसकी तैयारियां ज़ोर शोर से चल रही हैं।


क्यों हुई थी अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय की स्थापना
वर्ष 1920 में अलीगढ़ में इस विश्व विद्यालय की स्थापना की गई थी। अपने समय के महान समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान ने मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा दिलाने के लिए इसकी शुरुआत की थी।

समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान ने 1877 में सबसे पहले एक मुस्लिम स्कूल की स्थापना की थी, जिसे समय के साथ इंग्लिश से जोड़कर 'मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज' बनाया गया था। जिसके बाद इसे वर्ष 1920 में विश्व विद्यालय का दर्जा देते हुए एक पूर्ण स्वरूप में 'अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय' बनाकर स्थापित किया गया। जहां हर प्रकार की शिक्षा मौजूद है। यहाँ मुस्लिमों को प्राथमिकता के तौर पर एडमिशन दिया जाता है। यहाँ हिन्दू शिक्षक नाम मात्र ही उपलब्ध हैं।

Published on:
14 Sept 2022 05:26 pm
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