अलीगढ़ का ताला और हार्डवेयर जीएसटी के बाद सर्वाधिक प्रभावित है।
अलीगढ़। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लगाए एक साल हो गया। 1 जुलाई 2017 को जीएसटी एक महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को लागू किया गया था। सोचा था कि इससे कर भ्रष्टाचार रुकेगा। उद्योगों को लाभ होगा। एक साल बाद देखते हैं कि जीएसटी लगने के बाद भी उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अलीगढ़ में ताला और हार्डवेयर का काम घरों में होता है। यह कुटीर उद्योग की तरह है। लाखों लोग रोजगार पा रहे हैं। जीएसटी के बाद यही उद्योग सर्वाधिक प्रभावित है।
नुकसान हुआ
अलीगढ़ उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष अनुराग गुप्ता ने जीएसटी लागू होने के बाद ताला और हार्डवेयर उद्योग को नुकसान बताया है। उन्होंने कहा है कि भविष्य में जीएसटी के फायदे हो सकते हैं, लेकिन जीएसटी कार्यालय के सर्वर ठीक काम नहीं कर रहे हैं, इनका पोर्टल भी ठीक से नहीं खुलता है जिसके चलते फार्म आदि भरने में व्यापारियों को परेशानी आ रही है। जीएसटी के स्लैब अलग-अलग तरह के हैं। इनको एक करना पड़ेगा।
जीएसटी की दर 12 प्रतिशत हो
उन्होंने कहा कि जिन देशों में जीएसटी का एक स्लैब है, वहां जीएसटी सफल है। यहां ताला और हार्डवेयर उद्योग पर 18 प्रतिशत जीएसटी है, जिसके चलते ताला और हार्डवेयर कारोबारी परेशान है। जीएसटी लगने के बाद ताला और हार्डवेयर कारोबारियों ने 18 प्रतिशत जीएसटी से 12 प्रतिशत करने की मांग उठाई थी, लेकिन सरकार ने जीएसटी कम नहीं किया। व्यापारी नेता ने कहा कि हमारे देश की जनसंख्या पढ़ी-लिखी नहीं है, बिजनेस करने वाले लोग अभी भी जीएसटी को समझ नहीं पा रहे हैं। जिसके चलते परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
व्यापारियों की समस्या
ताला और हार्डवेयर कारोबारी सौरभ अग्रवाल ने बताया कि कच्चे सामान पर ही ताला और हार्डवेयर का कारोबार निर्भर करता है। मंदी के दौर में भी लोहे का रेट कम नहीं होने के चलते व्यापारियों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। वही स्क्रैप और मेटल के कारोबार में सट्टेबाजी से व्यापार को नुकसान हो रहा है। बड़े कारोबारी तो अपना काम चला लेते हैं, लेकिन छोटे कुटीर उद्योग के लिए व्यापार कर पाना कठिन होता है। सरकार को इस क्षेत्र से रेवेन्यू ज्यादा मिलता है, इसलिए और हार्डवेयर पर स्लैब की दर कम नहीं की जा रही है, जिससे कुटीर उद्योग को भारी नुकसान होगा। सरकार जब तक प्रयास करेगी तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। वहीं चाइना का सामान सस्ते में आ रहा है, जिसके चलते भारतीय सामान कहीं नहीं टिक पाएगा।