अलवर जिले के किसानों की आर्थिक हालत लगातार बदतर होती जा रही है। मौसम की अनिश्चितता, फसल की पैदावार लागत में बढ़ोतरी और मंडियों में उपज के गिरते भाव किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं।
अलवर जिले के किसानों की आर्थिक हालत लगातार बदतर होती जा रही है। मौसम की अनिश्चितता, फसल की पैदावार लागत में बढ़ोतरी और मंडियों में उपज के गिरते भाव किसानों को कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं। इस स्थिति से निकलना किसानों के लिए कठिन होता जा रहा है। जिले में कृषि कर्ज का कुल आंकड़ा अब 627 करोड़ रुपए पहुंच चुका है।
इस बार प्याज के दामों में गिरावट ने किसानों की कमर सबसे ज्यादा तोड़ी है। खेतों से उपज बढ़ी, लेकिन मंडी में कीमतें इतनी कम रहीं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया। किसानों को नुकसान की भरपाई करने के लिए फिर से समितियों और बैंकों का सहारा लेना पड़ा, जिससे कर्जा और बढ़ गया। सरकारी बैंकों ने जिले के 142074 किसान को यह कर्जा दिया हुआ है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए। साथ ही फसलों का लागत आधारित उचित समर्थन मूल्य तय कर बाजार में स्थिरता लाई जाए, ताकि किसान खेती से बाहर जाने के लिए मजबूर न हों।
फसल खराब होने पर राहत नहीं मिलती और बाजार में दाम गिरने पर पूरी मार किसानों पर ही झेलनी पड़ रही है। ऐसे में हर सीजन के बाद कर्ज बढ़ जाता है और उधार चुकाने के लिए फिर नए कर्ज लेने पड़ते हैं। कई किसान पिछले वर्षों के बकाया तक नहीं चुका पाए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।