शिक्षा विभाग प्रारम्भिक में अलवर जिले में ऐसे 19 शिक्षक हैं जो एक दशक से भी अधिक समय से बिना सूचना के नौकरी से गायब हैं, अब ऐसे शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। पंचायती राज के अधीन इन शिक्षकों को समाचार पत्र के माध्यम से नोटिस दिए गए हैं लेकिन ना तो इन्होंने इसका जवाब दिया और ना ही यह कार्यालय में आकर उपस्थित हुए हैं।
शिक्षा विभाग प्रारम्भिक में अलवर जिले में ऐसे 19 शिक्षक हैं जो एक दशक से भी अधिक समय से बिना सूचना के नौकरी से गायब हैं, अब ऐसे शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। पंचायती राज के अधीन इन शिक्षकों को समाचार पत्र के माध्यम से नोटिस दिए गए हैं लेकिन ना तो इन्होंने इसका जवाब दिया और ना ही यह कार्यालय में आकर उपस्थित हुए हैं। अब जिला परिषद की हुई डीईसी की बैठक में इनकी सेवा समाप्ति का प्रस्ताव पारित किया गया है। इनमें एक शिक्षक तो 2002 से ही गायब है।
ये हैं शिक्षक जो वर्षों से गायब-
राप्रावि. चनिया का बास की शिक्षिका सरोज अग्रवाल 2 जुलाई 2009 से , राप्रावि. अकबरपुर की शिक्षिका शांता शर्मा 14 अक्टूबर 2006 से, राप्रावि. धर्मपुरा की शिक्षिका अंजना मित्तल 29 अगस्त 2009 से, राप्रावि. चोलाई तिजारा से शिक्षिका ममता कुमारी 24 फरवरी 2009 से, राप्रावि मूनपुर मेवान की शिक्षिका सविता यादव्र, राप्रावि त्यागियों की ढाणी की शिक्षिका शशि बाला, राउप्रावि मोलियो की ढाणी की शिक्षिका सुमन बाई , राप्रावि खोहर के शिक्षक रोहताश 4 जुलाई 2013 से, राउप्रावि भूरिया वाली से शिक्षिका रामकला यादव 29 सितम्बर 2009 से गायब हैं।
इसी प्रकार राउप्रावि डोटाना तिजारा की शिक्षिका प्रीति शर्मा 13 दिसम्बर 2012 से, राउप्रावि हल्दीना की शिक्षिका राजबाला 2 जुलाई 2011 से, राप्रावि बिलंदी की शिक्षिका ममता 18 मार्च 2012 से, राउप्रावि ठेकडीन की शिक्षिका ज्योति गुप्ता एक जुलाई 2013 से बिना सूचना के नहीं आ रही हैं। नाडू स्कूल की अध्यापिका सविता मीणा 2 जुलाई 2013 तथा खानपुर मेवान की निधि गौड, खोहरा पीपली स्कूल की अंकिता, गूढा स्कूल की सीमा मौर्य वर्षों से नहीं आ रही हैं।