अलवर

2014 में थे 4 बाघ, 12 साल में 48 बढ़े, वर्ष 2034 तक शतक पूरा होने की उम्मीद

सरिस्का टाइगर रिजर्व का बाघ संरक्षण प्लान की मियाद खत्म हो गई है। अब अगले 10 साल में बाघों के संरक्षण के लिए नया प्लान तैयार होगा। इसे बाघ संरक्षण प्लान-2034 कहा जाएगा।

2 min read
May 03, 2026

सरिस्का टाइगर रिजर्व का बाघ संरक्षण प्लान की मियाद खत्म हो गई है। अब अगले 10 साल में बाघों के संरक्षण के लिए नया प्लान तैयार होगा। इसे बाघ संरक्षण प्लान-2034 कहा जाएगा। इसे बनाने का जिम्मा ग्लोबल टाइगर फोरम (जीटीएफ) को दिया गया है। इस फोरम में टाइगर विशेषज्ञों की बड़ी तादाद है, जो सरिस्का का भ्रमण करके करीब 6 माह में प्लान तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि सरिस्का में अगले 8 साल में बाघों का आंकड़ा शतकीय हो जाएगा।
सरिस्का वर्ष 2005 में बाघविहीन हो गया था। सरकार ने बाघ संरक्षण के लिए कदम बढ़ाया। वर्ष 2008 से 2012 के मध्य यहां एक बाघ व एक बाघिन का सरिस्का में प्रवेश हुआ। इनका पूरा संरक्षण किया गया। निगरानी तेज थी। वर्ष 2014 में दो शावक देखे गए। इस तरह बाघों की संख्या 4 हो गई। खुशखबर आई तो सरिस्का ने बाघ संरक्षण प्लान 2024 तैयार करवाया। यह प्लान काफी काम आया। हालांकि जिस गति से बाघों की संख्या बढ़नी थी, वह नहीं बढ़ी, लेकिन 12 साल में 4 से बढ़कर बाघों की संख्या 52 पहुंच गई। यानि इस अवधि में 48 बाघ बढ़े। इसी तरह लक्ष्य तय किया जा रहा है कि वर्ष 2034 तक बाघों का कुनबा 50 से अधिक बढ़ेगा और इसी के साथ संख्या सौ के पार हो जाएगी।
इन बिंदुओं पर करना होगा काम
-मानव जनित आपदाओं से बाघों को बचाना।
-बाघ संरक्षण के लिए कड़ी निगरानी। शिकारियों को जंगल से दूर रखना।
-सरिस्का में इलेक्टि्रक वाहन चलाना।
-सीटीएच से एक किमी की दूरी तक, बफर, राजस्व बफर एरिया में कमर्शियल गतिविधियों का संचालन बंद करना।
-प्रोटेक्शन फोर्स की तैनाती।
-सरिस्का में खाली 200 से ज्यादा पदों को भरना।
-एलिवेटेड रोड बनाना।
-पानी की पर्याप्त व्यवस्था करना।
-सरिस्का के जंगल का विस्तार करना।
-गांवों का विस्थापन।
यह है जीटीएफ ?
ग्लोबल टाइगर फोरम यानि जीटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय अंतर सरकारी निकाय है, जो विशेष रूप से रेंज देशों में जंगली बाघों के संरक्षण के लिए स्थापित किया गया है। 13 बाघ रेंज वाले देशों में से सात वर्तमान में जीटीएफ के सदस्य हैं। बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, भारत, म्यांमार, नेपाल और वियतनाम शामिल हैं। जीटीएफ का लक्ष्य बाघ संरक्षण के औचित्य को उजागर करना है। बाघ, उसके शिकार और उसके निवास स्थान के अस्तित्व की सुरक्षा के लिए दुनियाभर में नेतृत्व और एक सामान्य दृष्टिकोण प्रदान करना है।

Published on:
03 May 2026 11:02 am
Also Read
View All