जिला परिषद के अफसर भले ही कागजी आंकड़ों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हों लेकिन मनरेगा योजना के हाल यहां अच्छे नहीं हैं।
अलवर/पत्रिका। जिला परिषद के अफसर भले ही कागजी आंकड़ों को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहे हों लेकिन मनरेगा योजना के हाल यहां अच्छे नहीं हैं। 3357 काम पेंडिंग हैं। रैणी, बानसूर, राजगढ़ में सबसे अधिक कार्य पेंडिंग हैं। यदि ये काम होते तो ग्रामीण इलाकों में वाटर रिचार्जिंग से लेकर तमाम अच्छी चीजें नजर आतीं।
ये काम करवाए जाते
मनरेगा के तहत जोहड़ की खुदाई, मेड़बंदी, भूमि समतलीकरण, व्यक्तिगत लाभ के कार्य आदि करवाए जाते हैं। बताते हैं कि बारिश से पहले जोहड़ आदि की खुदाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि बारिश का पानी यहां रुक सके और वाटर रिचार्जिंग के काम आ सके लेकिन इसको प्राथमिकता नहीं मिली। तमाम कार्य पेंडिंग हैं। सवाल ये खड़ा है कि मजदूरों की संख्या इतनी होने के बाद भी काम लंबित क्यों हैं? जबकि यहां सौ की बजाय 125 दिन का रोजगार मजदूरों को दिया जा रहा है।
ये हैं पेंडिंग काम
ब्लॉक का नाम पेंडिंग काम
राजगढ़ 285
उमरैण 99
गोविंदगढ़ 124
कठूमर 295
किशनगढ़बास 135
रामगढ़ 182
लक्ष्मणगढ़ 156
कोटकासिम 113
नीमराणा 47
थानागाजी 249
बहरोड़ 89
बानसूर 223
मालाखेड़ा 107
मुंडावर 187
तिजारा 318
रैणी 748
इस साल के भी 550 काम लंबित
मनरेगा में जॉबकार्ड धारकों की संख्या यहां लाखों में है। कागजों में हर समय 20 हजार से ज्यादा मजदूरों को काम भी दिखाया जाता है लेकिन कामों की गति देखकर नहीं लगता कि उनसे काम लिया जा रहा है। यही कारण है कि अब तक हजारों काम लंबित हैं जबकि ये पूरे हो जाने चाहिए थे। चालू वित्तीय वर्ष के भी करीब 550 काम पेंडिंग चल रहे हैं। बड़े अफसर इसकी मॉनिटरिंग करते हैं लेकिन आंकड़े देखकर नहीं लगता कि मॉनिटरिंग सही हो पा रही है। क्योंकि कामों की गति ही काम बताती है।