विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू कर दी है। अब कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई तीन की बजाय
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सभी कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू कर दी है। अब कॉलेजों में स्नातक की पढ़ाई तीन की बजाय चार वर्ष की हो गई है। इसमें दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को मल्टीपल एंट्री का विकल्प मिलेगा। अगर कोई विद्यार्थी एक साल की पढ़ाई करने के बाद फेल हो जाता है अथवा पढ़ाई को छोड़ता है तो उसके दाखिला लेने से आठ साल में 4 वर्षीय ग्रेजुएशन करने का मौका मिलेगा।
फेल या गैप ईयर होने पर भी स्नातक करने के लिए 8 वर्ष का ही वक्त मिलेगा। एक साल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी को सर्टिफिकेट, दो साल की पढ़ाई के लिए डिप्लोमा, तीन साल की पढ़ाई के लिए डिग्री और चार साल की पढ़ाई के लिए ऑनर्स की डिग्री दी जाएगी।
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में दाखिले लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को इंटर्नशिप करना अनिवार्य होगा। इंटर्नशिप में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि ग्रेजुएशन पूरे होने पर रोजगार मिल सके।
अलवर सहित प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में अगले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातकोत्तर (एमए, एमएससी व एम.कॉम) स्तर पर भी एनईपी 2020 को लागू करने की योजना है। इसके बाद सभी विवि में पूर्ण रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2.0 में कौशल आधारिक कोर्स पर फोकस किया जाएगा, ताकि युवाओं को आसानी से रोजगार मिल सके। इसके साथ ही क्रेडिट सिस्टम को लेकर भी कुछ बदलाव हो सकते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने से विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जो विद्यार्थी किसी कारणवश अपनी डिग्री को पूरा नहीं पाते थे। अब वे 8 साल में डिग्री को पूरा कर सकेंगे। इसमें विद्यार्थी मल्टीपल सब्जेक्ट ले सकता है। इसमें विद्यार्थियों को इंटर्नशिप भी करनी होगी।
कैप्टन फैलीराम मीणा, रजिस्ट्रार, मत्स्य विवि, अलवर