
अलवर की सफल व्यापारी लक्ष्मी शर्मा (फोटो-पत्रिका)
अलवर। कहते हैं कि वक्त जब इम्तिहान लेता है, तो चारों ओर अंधेरा छा जाता है, लेकिन कुछ शख्सियतें ऐसी होती हैं जो उस अंधेरे को चीरकर अपनी मेहनत से नई रोशनी पैदा करती हैं। अलवर की लक्ष्मी शर्मा एक ऐसी ही साहसी महिला का नाम है। जीवन के क्रूर थपेड़ों ने पहले जवान बेटे को छीना और फिर दामाद भी चल बसा, लेकिन लक्ष्मी ने हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। लक्ष्मी आज न केवल एक सफल व्यवसायी हैं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सहारा भी बन चुकी हैं।
अलवर निवासी लक्ष्मी शर्मा ने कोलकाता से अलवर आकर न केवल स्वयं का व्यवसाय शुरू किया, बल्कि अपने पति को भी अपने कार्य से जोड़ा। आज पति-पत्नी मिलकर अलवर सहित देश के विभिन्न शहरों में कपड़ों और घरेलू सामान का सफल व्यवसाय चला रहे हैं।
मध्य प्रदेश की मूल निवासी लक्ष्मी शर्मा की शादी अलवर में हुई, लेकिन पति का व्यवसाय कोलकाता में होने से वे वहीं रहने लगीं। अलवर में ससुराल होने से यहां आना-जाना लगा रहता था। जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। तभी बड़े बेटे की शादी के कुछ वर्षों बाद उसकी अचानक मृत्यु हो गई। उस समय पोते की उम्र मात्र पौने दो वर्ष थी। गहरे सदमे के बावजूद लक्ष्मी शर्मा ने साहसिक निर्णय लेते हुए अपनी बहू का पुनर्विवाह कराया।
कुछ समय बाद पति-पत्नी कोलकाता छोड़कर अलवर आ गए, लेकिन यहां कोई स्थायी रोजगार नहीं था। ऐसे में लक्ष्मी शर्मा ने घर से ही रेडीमेड सूट और साड़ियों का कार्य शुरू किया। पैसे की कमी के बावजूद कोलकाता में बनी पहचान के चलते उधार माल लेकर व्यवसाय की शुरुआत की। उनकी मेहनत और कुशल व्यवहार के कारण व्यापार ने तेजी से गति पकड़ी और आय के नए रास्ते खुले।
लक्ष्मी शर्मा बताती हैं कि जब उन्हें जरूरत थी, तब समाज के लोगों ने उनका साथ दिया। आज वे स्वयं जरूरतमंद महिलाओं को उधार सामान उपलब्ध कराकर रोजगार में मदद कर रही हैं।
बेटे की मृत्यु के बाद दामाद की मृत्यु हो गई। इससे लक्ष्मी शर्मा को फिर गहरा आघात पहुंचा, लेकिन उन्होंने स्वयं को संभालते हुए पति और व्यापार दोनों की जिम्मेदारी निभाई। करीब 14 वर्ष पूर्व घर से शुरू हुआ यह कार्य आज अलवर के मुख्य बाजार में दुकान के रूप में स्थापित हो चुका है।
Published on:
25 Jan 2026 05:47 pm

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