अलवर अब शहर के मोती डूंगरी से पूरा ब्रह्मांड दिखेगा। चांद, तारों से लेकर आकाशगंगा नजर आएंगी। सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण व अन्य खगोलीय घटनाएं भी नजदीक से देखी जा सकेंगी।
अलवर अब शहर के मोती डूंगरी से पूरा ब्रह्मांड दिखेगा। चांद, तारों से लेकर आकाशगंगा नजर आएंगी। सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण व अन्य खगोलीय घटनाएं भी नजदीक से देखी जा सकेंगी। यूआइटी यहां टेलीस्कोप लगाने जा रही है। इस पर करीब 25 लाख रुपए खर्च होंगे। साथ ही, इसी डूंगरी की चोटी पर पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भी 30 फीट ऊंची लगेगी। इस पर करीब सवा करोड़ रुपए खर्च होगा। जनवरी में ही इस प्रस्ताव को धरातल पर लाने की योजना है।
यूआइटी टेलिस्कोप के जरिए आय भी करेगी। इसके लिए टिकट की व्यवस्था होगी। हालांकि किराया सामान्य होगा। बाहर के लोगों के लिए किराया अलग होगा। छात्रों के शैक्षिक टूर आदि के लिए किराये में छूट आदि किए जाने की योजना है।
टेलीस्कोप दूर के ग्रहों, सितारों, आकाश गंगा और अन्य खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने में मदद करते हैं, जिससे ब्रह्मांड की हमारी समझ बढ़ती है।
वैज्ञानिक अनुसंधान में मदद करेगा। खगोलविदों को भौतिकी, रसायन विज्ञान और ब्रह्मांड विज्ञान के सिद्धांतों का परीक्षण करने के लिए महत्वपूर्ण डेटा मिल सकेगा।
टेलीस्कोप छात्रों और आम जनता में विज्ञान और खगोल विज्ञान के प्रति रुचि जगाएगा।
तकनीकी नवाचार में मदद मिल सकेगी।
भारत में सबसे अच्छी ऑप्टिकल (दृश्य प्रकाश) टेलीस्कोप वेधशाला तमिलनाडु के कोडैकनाल में स्थित है, जिसे आधिकारिक तौर पर भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आइआइए) की ओर से संचालित किया जा रहा है। इसी तरह देश का सबसे बड़ा ऑप्टिकल टेलीस्कोप उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है। यह आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज की ओर से संचालित किया जा रहा है।
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सबसे ऊंची 65 फीट ऊंची प्रतिमा उत्तर प्रदेश के लखनऊ में है। इसी तरह हरियाणा के पंचकूला में 41 फीट की प्रतिमा लगाई गई है। मध्य प्रदेश के सागर व जयपुर में भी उनकी प्रतिमाएं लगाई गई हैं। इसी क्रम में अलवर में भी प्रतिमा लगाई जा रही है। इसका प्रस्ताव वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने रखा तो यूआइटी ने यह तैयार किया है।
मोती डूंगरी पर दो बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च होगी। खगोलीय घटनाओं को देखने के लिए टेलीस्कोप लगेगा। साथ ही, पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा लगाई जाएगी - कुमार संभव अवस्थी, एक्सईएन, यूआइटी अलवर