पोषाहार खाने के लिए बेहतर क्वालिटी के बर्तन भी नहीं आए अलवर. आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले बच्चों को आज तक ना तो दूध दिया जा रहा है और ना ही यूनिफार्म ही दी जा रही हैं। जबकि स्कूल में पढ़ने वालों को यह सुविधा पहले से ही दी जा रही है। ऐसे में जिले के करीब 81 हजार 603 बच्चों को इसका इंतजार बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा के दौरान राज्य के 62 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को यूनिफार्म दिए जाने की घोषणा की थी। इस पर करीब 180 करोड रुपए खर्च किए जाने थे। सरकार ने बच्चों के लिए गर्म पोषाहार की बढिया क्वालिटी व पोषाहार खाने के लिए अच्छी क्वालिटी की प्लेट, चम्मच व पीने के लिए गिलास दिए जाने का भी वायदा किया था लेकिन आज तक इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है। यदि यूनिफार्म मिल जाती है तो बच्चों को भी पहचान मिल जाएगी और वो पहचान के मोहताज नहीं होंगे।
फैक्ट फाइल
जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 3443अलवर शहर के आंगनबाड़ी केंद्र 154
3से 6 साल के बालक 42,5923से 6 साल की बालिकाएं 39011
स्कूल में दी जा रही है यूनिफार्म व दूध की सुविधा
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री की बजट घोष् णा के अनुसार मिड डे मील योज ना के तहत राजकीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को सप्ताह में दो पाउडर मिल्क से तैयार दूध दिया जाता है। बच्चों को निशुल्क यूनिफार्म का कपडा दिया जाता है। इसकी सिलाई के लिए भी पैसा सरकार ही देती हैं। लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को ना तो दूध ही दिया जाता है और ना ही यूनिफार्म मिली है।
आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म, पोषाहार खाने के लिए क्वालिटी के बर्तन व दूध आदि के सं बंध में अभी तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
जितेंद्र मीणा, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, अलवर।