मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (एमआईए) की कुछ फैक्ट्रियां से निकल रहे रसायनयुक्त पानी से आसपास के गांव बर्बादी की ओर हैं। हाल ही फैक्ट्रियों से बांध में पहुंचे रासायनिक पानी से एक दिन में 3.25 लाख मछली का बीज (छोटी मछली) खत्म हो गया।
मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र (एमआईए) की कुछ फैक्ट्रियां से निकल रहे रसायनयुक्त पानी से आसपास के गांव बर्बादी की ओर हैं। हाल ही फैक्ट्रियों से बांध में पहुंचे रासायनिक पानी से एक दिन में 3.25 लाख मछली का बीज (छोटी मछली) खत्म हो गया। इसके अलावा भू जल भी प्रदूषित हो रहा है। कई फैक्ट्रियां रात्रि को गैस व रसायनयुक्त पानी छोड़ते हैं। इस कारण आसपास के करीब 10 से 15 गांवों की फसल को भी नुकसान हो रहा है।
आमजन ने कई बार प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के अधिकारियों और जिला प्रशासन को शिकायत की। लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला। कई सालों से सीईटीपी बनाने की तैयारी सिर्फ कागजों में सिमटी है। इस बार अग्यारा बांध में मछली पालन का ठेका लेने वाले सतीश चौधरी ने दावा किया कि बांध में बंगाल से करीब 3.25 लाख मछली बीज लाकर छोड़ा था। दो दिन में पूरी मछलियां मर गई। मछलियों की त्वचा जलने जैसी हो गई थी।
पेयजल का भी संकट
बांध में आ रहे प्रदूषित व रसायनयुक्त पानी से इसके आसपास के गांव डूमेड़ा, अग्यारा, उपला बगड़, नीचला बगड़, सिरिया का बास, मीणापुरा सहित करीब 10 -15 गांवों में भू-जल खराब हो रहा है। बांध के आसपास कई कुएं और बोर हैं। रसायनयुक्त पानी इनसे जमीन में पहुंच रहा है। मजबूरन लोग 500 फीट नीेचे का बोर कराकर पाने का पानी उपयोग ले रहे हैं।
फसलें भी हो रही खराब
एमआईए के आसपास कुछ फैक्ट्रियां रसायनयुक्त पानी व गैस रात्रि को खुले में छोड़ते हैं। जिसका असर खेतों में खड़ी फसलों पर भी पड़ता है। कई बार तो फसल खराब हो जाती हैं। बांध के पानी से मवेशियों की जान जाने का खतरा भी रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार मौन धारण किए बैठे हैं।
फैक्ट फाइल
अग्यारा बांध ...... करीब 100 बीघा में
प्रभावित गांव ...... करीब 15 गांव
प्रदूषण मंडल करे कार्रवाई
नरेश अग्रवाल अध्यक्ष एमआईए ने बताया कि कुछ फैक्ट्रियां पूरे एमआईए को बदनाम कर रही हैं। यह सच है कि उनका प्रदूषण अधिक है। जिन पर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल को सख्ती करने की जरूरत है। तभी इसे रोका जा सकता है। सख्त कदम उठाना जरूरी है।
पशु मर रहे, पीने को पानी नहीं
रमेश पंच डूमेड़ा निवासी ने बताया कि कुछ फैक्ट्रियां रात्रि में गैस व रसायनयुक्त पानी छोड़ती हैं। जो बांध में पहुंच रहा है। इससे भू-जल खराब हो रहा है। पशु मर रहे हैं। जमीन का पानी 200 फीट तक खराब हो चुका है। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल कार्रवाई नहीं कर रहा है।
सीईटीपी प्रस्ताव अंतिम चरण में
विवेक गोयल क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने बताया कि बांध में रसायनयुक्त पानी पहुंच रहा है। जिसका समाधान सीईटीपी बनने से होगा। जिसके लिए प्रस्ताव फाइनल होने वाला है। फिर फैक्ट्री के नाम से शिकायत मिलने पर तुरन्त कार्रवाई की जाएगी।