रकबर खान की हत्या के मामले में पुलिस खुद को बचाने के लिए दूसरों को फंसा रही है।
रकबर की हत्या के मामले में ललावंडी निवासी तीन युवकों की गिरफ्तारी से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। लोगों में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ गुस्सा है। मामले में गिरफ्तार युवकों के परिजन कार्रवाई को ग्रामीणों के साथ धोखा बता रहे हैं। उनका कहना था कि जिन युवकों को रकबर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, वे पूर्व में भी पुलिस की मदद करते रहे हैं। घटना वाले दिन भी पुलिस ने युवकों से मदद मांगी थी। अब पुलिस उन्हें ही हत्यारा साबित करने में जुटी हुई है। सच्चाई ये है कि पुलिस खुद को बचाने के लिए दूसरों को फं
साने में लगी हुई है। उनका कहना था कि तीनों गिरफ्तार युवक निर्दोष हैं। पुलिस अपनी गलती का ठीकरा इनके सिर फोड़ रही है। गौरतलब है कि मामले में पुलिस खुद की कहानी में ही फंस गई है। पुलिस के अनुसार उन्हें शुक्रवार रात 12.41 बजे गोतस्करों के ललावंडी में आने की सूचना मिली। थाने से ललावंडी की दूरी मात्र 4 किलोमीटर है। पुलिस एक युवक के साथ केवल दस मिनट में यानि 12.50 बजे घटनास्थल पहुंच गई। तब रकबर जीवित था। उसे थाने लाया गया। तबीयत बिगडऩे पर उसे शनिवार तडक़े चार बजे अस्पताल ले जाया गया। यानि इन तीन घंटों में उसके साथ ऐसा क्या हुआ, कि उसकी जान चली गई। जानकारों की मानें तो रकबर की हालत इतनी ही खराब थी तो पुलिस उसे लेकर सीधे अस्पताल क्यों नहीं पहुंची?
जांच चल रही है
ललावंडी प्रकरण की जांच चल रही है। मामले में अब तक तीन जनों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की जंाच सीओ दक्षिण अनिल बेनिवाल कर रहे हैं। आरोपित की पुलिस कस्टडी में मौत के भी आरोप लग रहे हैं। इसे लेकर क्राइम एण्ड विजिलेंस जयपुर के एएसपी को जांच सौंपी गई है।
राजेन्द्र सिंह,
जिला पुलिस अधीक्षक अलवर