अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आज अलवर शहर में विवाह की धूम है।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आज अलवर शहर में विवाह की धूम है। फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने और समाज को सादगी का संदेश देने के उद्देश्य से शहर भर में विभिन्न संस्थाओं की ओर से सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन किया गया है, जिसमें 26 जोड़ों ने नई जीवन यात्रा की शुरुआत की।
अबूझ सावे के रूप में प्रसिद्ध अक्षय तृतीया का दिन आज अलवर के लिए एक सामाजिक मिसाल बन गया है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में आज सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जो न केवल परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं, बल्कि समाज में सादगी और फिजूलखर्ची को रोकने का एक बड़ा संदेश भी दे रहे हैं।
आज शहर में तीन प्रमुख स्थानों पर सामूहिक विवाह का आयोजन किया जा रहा है:
सेवा भारती: मालवीय नगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में सेवा भारती की ओर से 9 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा रहा है।
सतीश भाटिया चैरिटेबल ट्रस्ट: रेलवे स्टेशन स्थित सार्वजनिक गोशाला में संस्था ने 6 जोड़ों के विवाह का बीड़ा उठाया।
कश्यप समाज: जयसमंद स्थित रेस्ट हाउस में कश्यप समाज की ओर से 11 जोड़ों का सामूहिक विवाह आयोजित किया गया।
सामूहिक विवाह आयोजकों का मानना है कि वर्तमान समय में शादियों में होने वाली बेतहाशा फिजूलखर्ची मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए एक बोझ बन गई है। इन सम्मेलनों के माध्यम से न केवल परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ है, बल्कि समाज में एकजुटता की भावना भी प्रबल हुई है। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में कुरीतियों को मिटाने और गरीब कन्याओं के हाथ पीले करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
दिन भर शहर में बैंड-बाजों की गूंज और शहनाइयों की आवाज के बीच माहौल बेहद उत्साहजनक रहा। जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति इन कार्यक्रमों में पहुंचे। सामूहिक विवाह के दौरान सादगीपूर्ण तरीके से रस्में निभाई गईं, जिसने समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है।
अलवर के लोगों ने इन संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि अक्षय तृतीया पर किया गया यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। प्रशासन और स्थानीय प्रबुद्धजनों ने भी सामूहिक विवाह की इस मुहिम को समाज के लिए बेहद जरूरी और सराहनीय कदम बताया है।