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अलवर सेंट्रल जेल की सुरक्षा में फिर बड़ी सेंध, दीवार फांदकर अंदर पहुचाये 7 मोबाइल

राजस्थान के अलवर स्थित केंद्रीय कारागृह (सेंट्रल जेल) की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जेल के भीतर प्रतिबंधित सामग्री पहुंचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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May 04, 2026
अलवर केंद्रीय कारागृह (फाईल फोटो)

राजस्थान के अलवर स्थित केंद्रीय कारागृह (सेंट्रल जेल) की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जेल के भीतर प्रतिबंधित सामग्री पहुंचने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में जेल प्रशासन ने परिसर के भीतर से मोबाइल फोन बरामद किए हैं। 2 मई की देर रात हुई इस घटना ने जेल की निगरानी और बाहरी सुरक्षा घेरे की पोल खोलकर रख दी है।

जुराब और मल्टीविटामिन के डिब्बे में मिला 'खजाना'

प्राप्त जानकारी के अनुसार 2 मई की रात को जेल के हल्का नंबर-2 में स्टाफ टॉयलेट के पास गश्त के दौरान एक संदिग्ध पैकेट मिला। जब सुरक्षाकर्मियों ने इसे खोलकर देखा तो दंग रह गए। निषिद्ध सामग्री को एक जुराब के अंदर बेहद सावधानी से छिपाकर फेंका गया था। जुराब के भीतर एक मल्टीविटामिन का डिब्बा रखा था, जिसके अंदर ठूंस-ठूंस कर 7 मोबाइल फोन और एक डेटा केबल रखी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी मोबाइल बिना सिम कार्ड के थे, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि जेल के भीतर पहले से ही सिम कार्ड मौजूद हो सकते हैं या इन्हें बाद में पहुंचाने की योजना थी।

वीडियोग्राफी के साथ जब्ती की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन के उच्च अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। पूरी बरामदगी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसकी वीडियोग्राफी कराई गई। जेल प्रशासन ने फिलहाल सभी मोबाइलों को सीलबंद कर जब्त कर लिया है और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा प्रहरियों की तैनाती के बावजूद अपराधी पैकेट फेंकने में सफल कैसे हुए, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

पुरानी घटनाओं से नहीं लिया सबक

अलवर जेल में बाहरी दीवार के ऊपर से सामान फेंकने (Throwing) की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 24-25 मार्च की दरम्यानी रात को भी वार्ड नंबर-1 के पास इसी तरह की हलचल हुई थी। उस दौरान भी ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों ने शौचालय के पास झाड़ियों से गांजा और मोबाइल बरामद किए थे। बार-बार हो रही इन घटनाओं से साफ है कि जेल के बाहर सक्रिय गिरोह लगातार जेल के भीतर बंद अपराधियों से संपर्क में हैं और उन्हें अवैध सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं।

सप्लायरों का सुराग न लगना बड़ी चुनौती

हर बार घटना के बाद पुलिस रिपोर्ट दर्ज की जाती है और जांच का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक उन सप्लायरों का चेहरा सामने नहीं आ पाया है जो रात के अंधेरे में जेल की दीवारों के पास सक्रिय रहते हैं। इतनी कड़ी निगरानी और हाई-टेक सुरक्षा के दावों के बीच, मोबाइल और मादक पदार्थों का जेल के 'हार्ट' तक पहुंच जाना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। फिलहाल, पुलिस और जेल इंटेलिजेंस इस बात की जांच कर रही है कि इन सात मोबाइलों का 'कन्साइनमेंट' जेल के किस बैरक या किस खास अपराधी के लिए भेजा गया था।

Published on:
04 May 2026 11:54 am
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