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सरिस्का में दिखा बाघिन ST-19 और शावक का जलवा, मंत्री ने श्योदानपुरा में देखी बाघों की अठखेलियां

सरिस्का के श्योदानपुरा क्षेत्र में बाघिन ST-19 और उसके नन्हे शावक की साइटिंग हुई है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के करीब होने के कारण सरिस्का आज न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है, बल्कि बाघों के संरक्षण के लिए एक सुरक्षित 'हॉटस्पॉट' के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है।

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राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। सरिस्का के श्योदानपुरा क्षेत्र में बाघिन ST-19 और उसके नन्हे शावक की साइटिंग हुई है। प्रदेश के वन राज्यमंत्री संजय शर्मा उस समय रिजर्व के निरीक्षण पर थे, जिन्होंने अपनी आंखों से इस नजारे को देखा और बाघों के बढ़ते कुनबे पर प्रसन्नता व्यक्त की।

निरीक्षण के दौरान श्योदानपुरा में एक तालाब के पास बाघिन ST-19 आराम करती नजर आई और कुछ ही देर में उसका शावक भी वहां दिखाई दिया। इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो रहे हैं।

संख्या 50 के पार

उन्होंने इस सफलता का श्रेय वन विभाग के कर्मचारियों की कार्यकुशलता और राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन को दिया। मंत्री ने कहा कि अलवर शहर के इतने नजदीक बाघों की यह सक्रियता पर्यावरण और पर्यटन दोनों के लिए एक शुभ संकेत है। गौरतलब है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। पिछले कुछ वर्षों में किए गए निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि आज सरिस्का में बाघों और शावकों की कुल संख्या 50 से अधिक पहुंच गई है।


दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के करीब होने के कारण सरिस्का आज न केवल एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है, बल्कि बाघों के संरक्षण के लिए एक सुरक्षित 'हॉटस्पॉट' के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है। बाघिन ST-19 पिछले कुछ समय से अपने शावकों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में देखी जा रही है, जिसके वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

बाघों की बढ़ती संख्या और जंगलों में उनकी सक्रियता को देखते हुए वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगल के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करें। साथ ही, पर्यटकों से भी अनुरोध किया गया है कि सफारी के दौरान वन्यजीवों की शांति भंग न करें और सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करें। सरिस्का की यह उपलब्धि वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि यह न केवल जैव विविधता को समृद्ध कर रहा है बल्कि स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।