देवउठनी एकादशी के साथ ही जिले में शादी व अन्य आयोजनों की फिर से शुरूआत हो चुकी है, लेकिन लोगों ने सतर्कता नहीं बरती तो कोरोना संक्रमण के पलटी खाने का खतरा भी कम नहीं है। कारण है कि कोरोना की दूसरी लहर भी गत वर्ष दीपावली के बाद एवं शादी- ब्याह की शुरुआत के बाद ही आई थी।
अलवर. देवउठनी एकादशी के साथ ही जिले में शादी व अन्य आयोजनों की फिर से शुरूआत हो चुकी है, लेकिन लोगों ने सतर्कता नहीं बरती तो कोरोना संक्रमण के पलटी खाने का खतरा भी कम नहीं है। कारण है कि कोरोना की दूसरी लहर भी गत वर्ष दीपावली के बाद एवं शादी- ब्याह की शुरुआत के बाद ही आई थी। इस बार खतरा ज्यादा है, कारण है कि राज्य सरकार ने पिछले दिनों ही शादी समारोह एवं अन्य आयोजनों में लोगों के शामिल होने की संख्या पर लगी पाबंदी को पूरी तरह हटा दिया है। इस कारण इस बार शादी समारोह में फिर से भीड़भाड़ बढऩे की आशंका है। वहीं लोगों की ओर से कोरोना प्रोटोकॉल में भी लापरवाही बरती जा रही है। अलवर का दिल्ली व अन्य बड़े शहरों से जुड़ाव भी कोरोना संक्रमण को फिर आमंत्रण देने का कारण बन सकता है।
अलवर जिले में इन दिनों कोरोना का संक्रमण काफी कम है, इस कारण ही लोग कोरोना प्रोटोकॉल की पालना के प्रति लापरवाही बरतने लगे हैं। राज्य सरकार की ओर से भीड़भाड़ कम करने के लिए लगाई पाबंदी भी खत्म हो चुकी है। इस कारण बाजार से लेकर शादी ब्याह समारोह में लोगों की फिर से भीड़ बढऩे लगी है। कार्यक्रमों में बढ़ती भीड़ ही प्रदेश में कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या में वृद्धि का कारण बनने लगी है। पिछले दिनों अलवर सहित प्रदेश में कोरोना के एक्टिव केस फिर से बढ़े हैं। अलवर जिले में वर्तमान में कोरोना का एक्टिव केस है। एक महीने से ज्यादा समय तक अलवर जिला कोरोना के एक्टिव केस से फ्री रहा, लेकिन पिछले ही दिनों एक कोरोना का मामला मिलने से चिंता फिर से बढ़ गई है।
कोरोनाकाल में अलवर रहा संवेदनशील
कोरोनाकाल में अलवर जिला संवेदनशील रहा है। इसका मुख्य कारण दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर एवं अन्य बड़े शहरों से सीधा जुड़ाव होना है। दिल्ली देश की राजधानी होने के कारण वहां देश भर से लोगों का आना जाना रहता है। वहीं व्यापारिक एवं अन्य कारणों से लोगों का अलवर से दिल्ली आना जाना रहता है। अभी देश के कई राज्यों में कोरोना का संक्रमण कायम है, ऐसे में अलवर जिले में बड़े शहरों से कोरोना संक्रमण का खतरा सदैव रहता है। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में भी दिल्ली सब्जी मंडी सहित अन्य कारणों से कोरोना संक्रमण अलवर में दस्तक दे चुका है।
जीका वायरस है खतरनाक
कोरोना का जीका वायरस इन दिनों खतरनाक है। यह वायरस देश के कुछ राज्यों में मिला है। हालांकि अभी तक अलवर जिले में इस खतरनाक वायरस की उपस्थिति नहीं मिली है, लेकिन खतरा बरकरार है। कारण है कि अलवर जिले में भिवाड़ी, नीमराणा सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में देशी व विदेशी लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में किसी भी खतरनाक वायरस की इन स्थानों तक पहुंच संभव है।
लापरवाही से बचना होगा, तभी बचेंगे संक्रमण से
सरकार की ओर से दी गई छूट का लाभ तभी मिल सकेगा, जब लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करेंगे। चेहरे मास्क, दो गज दूरी, भीड़भाड़ से बचने एवं सेनेटाइजर की अनिवार्यता जैसे कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन कर ही कोरोना संक्रमण से बचना संभव है।
प्रशासन को भी उठाने होंगे सख्त कदम
कोरोना संक्रमण कम होने पर लोगों के साथ ही प्रशासनिक लापरवाही भी बढ़ी है। राज्य सरकार की ओर से कोरोना प्रोटोकॉल की पालना अनिवार्य किए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से इसकी पालना के प्रयास नगण्य हैं। यही कारण है कि लोगों के चेहरे से मास्क हटने लगे हैं, वहीं भीड़भाड़ बढऩे लगी है। इतना ही खुद प्रशासन के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की ओर से कोरोना प्रोटोकॉल की पालना में लापरवाही देखी जा सकती है।
जांच बढ़ाने के दिए निर्देश
कोरोना का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करना चाहिए। जीका वायरस का अभी जिले में कोई केस नहीं मिला है, लेकिन सतर्कता जरूरी है। कोरोना की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। कोरोना जांच के मामले में अलवर जिला अभी प्रदेश में जयपुर, जोधपुर के बाद तीसरे नम्बर है।
डॉ. ओपी मीणा
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अलवर