
अलवर। खेरली क्षेत्र के दांतिया गांव में दो मासूम बच्चों की हत्या और मां ऊषा का शव मिलने के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान अहम सुराग पुलिस के हाथ लगा है। ऐसे में पुलिस अब दूसरे एंगल से भी जांच में जुटी हुई है। गौरतलब है कि घटना के बाद प्रारंभिक जानकारी में परिजनों और पुलिस की ओर से कैंची से वार किए जाने की बात सामने आई थी।
थाना अधिकारी विजय चंदेल ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण कर मौका नक्शा तैयार करने के दौरान एक खून लगा चाकू मिला। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। बता दें कि रविवार को ग्राम दांतिया में मां ने ही अपने दो मासूम बच्चों मुकुल और नंदिता की हत्या कर दी थी। इसके बाद महिला का शव भी कमरे से बरामद हुआ था। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने सोमवार को घटनास्थल का मौका मुआयना कर परिजनों और आस-पड़ोस के लोगों के बयान भी दर्ज किए।
मृतका ऊषा के ससुर बृजभूषण शर्मा ने बताया कि नंदिका घर के बाहर खेलने जाने की जिद कर रही थी, इसी बात पर ऊषा को गुस्सा आ गया। वह नंदिका और मुकुल को डांटते हुए जबरन अपने कमरे में ले गई और अंदर से दरवाजा बंद कर इस घटना को अंजाम दिया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और गेट खोलने की कोशिश की। घायल अवस्था में मुकुल ने कमरे का दरवाजा खोल दिया। अंदर ऊषा और दोनों बच्चों को लहूलुहान देख ग्रामीण स्तब्ध रह गए।
मृतका ऊषा का पीहर डीग जिले के कोरेर गांव में है। ऊषा की छोटी बहन मनीषा की भी इसी घर में शादी हुई। ऊषा व मनीषा देवरानी-जेठानी हैं। मनीषा ने अपनी बहन ऊषा और दोनों बच्चों को लहूलुहान हालत में देखा, तो उसने अपना सिर दीवार पर दे मारा, जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल मनीषा का जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उपचार जारी है।
परिजनों से पूछताछ में सामने आया कि ऊषा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसका उपचार चल रहा था। परिवार वाले इसी डर से दोनों बच्चों को रात में ऊषा के साथ नहीं सुलाते थे। वे बच्चों को हमेशा अपने पास रखते थे। शवों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. संतोष यादव ने बताया कि तीनों के गलों पर जगह-जगह कटने के निशान हैं। मृतका ऊषा के पेट पर भी कुछ खरोंच के निशान हैं।