
अलवर सामान्य अस्पताल की नई मोर्चरी में शवों को सुरक्षित रखने के लिए लगाए गए दोनों डीप-फ्रीजर लंबे समय से पर्याप्त कूलिंग नहीं दे रहे हैं। इनमें से एक डीप-फ्रीजर लगातार खराब चल रहा है। मोर्चरी की यह गंभीर स्थिति 24 और 25 अगस्त को रखे गए दो लावारिस शवों के मामले में सामने आई।
जब दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी से बाहर निकाले गए तो उनमें सड़न और तेज दुर्गंध शुरू हो चुकी थी। शव फूल गए थे और त्वचा का रंग भी काला पड़ने लगा था। इस स्थिति को लेकर अस्पताल की मोर्चरी व्यवस्था और डीप-फ्रीजर के मेंटेनेंस पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पुरानी मोर्चरी से दोनों डीप-फ्रीजर नई मोर्चरी में शिफ्ट करने के लिए 25 जुलाई को 1 लाख 15 हजार रुपए प्लस जीएसटी का वर्क ऑर्डर जारी किया गया था।
वर्क ऑर्डर में डीप-फ्रीजर को शिफ्ट करने के साथ उनकी जांच करने और किसी तरह की कमी मिलने पर मेंटेनेंस व रिपेयरिंग कर उन्हें पूरी तरह चालू हालत में लगाने की शर्त रखी गई थी।
इसके साथ ही काम एक सप्ताह के भीतर पूरा करने की शर्त भी थी। तय समय में काम पूरा नहीं होने पर वर्क ऑर्डर निरस्त किए जाने का प्रावधान रखा गया था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं हुआ और वर्क ऑर्डर भी निरस्त नहीं किया गया। बाद में अगस्त के दूसरे सप्ताह में दोनों डीप-फ्रीजर को नई मोर्चरी में शिफ्ट कर दिया गया।
नई मोर्चरी में चार-चार केबिन वाले दो डीप-फ्रीजर लगाए गए हैं। इनमें एक साथ कुल आठ शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता है। अलवरएनईबी थाना पुलिस ने 24 अगस्त को एक लावारिस शव की पहचान के लिए सामान्य अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया था। इसके अगले दिन 25 अगस्त को जीआरपी थाना पुलिस ने भी एक लावारिस शव मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया।
शनिवार को पोस्टमार्टम के दौरान दोनों शवों की स्थिति खराब मिली। पर्याप्त कूलिंग नहीं मिलने के कारण शवों में सड़न और दुर्गंध शुरू हो गई थी। शवों के फूलने और त्वचा का रंग काला पड़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। अब सवाल यह है कि मेंटेनेंस और शिफ्टिंग के लिए वर्क ऑर्डर जारी होने के बावजूद डीप-फ्रीजर पूरी क्षमता से काम क्यों नहीं कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के लिए नई मोर्चरी के दोनों फ्रीजर को जल्द ठीक कराना जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में शवों को सुरक्षित रखने में इस तरह की परेशानी दोबारा सामने न आए।