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Alwar: बाजार में पार्किंग संकट, सभी प्रस्ताव फेल; कब तक सड़क किनारे खड़ी होंगी गाड़ियां

अलवर शहर के प्रमुख बाजारों में पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान फिलहाल दूर नजर आ रहा है। पार्किंग के लिए बनाए गए कई प्रस्ताव जमीन, स्वामित्व और तकनीकी अड़चनों में फंस गए हैं। ऐसे में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को सड़क किनारे वाहन खड़े करने पड़ रहे हैं, जिससे जाम बढ़ने की आशंका है।
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parking crisis

बाजार में लगा जाम (फाइल फोटो - पत्रिका)

अलवर शहर के बाजारों में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए बने तमाम प्रस्ताव कागजों से आगे नहीं बढ़ पाए। जहां भी पार्किंग की जगह तलाश कर योजना तैयार की गई, वहां जमीन, स्वामित्व, तकनीकी या अन्य किसी पेच ने रास्ता रोक दिया। नतीजा यह कि बाजारों में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को अब सड़क किनारे ही वाहन खड़े करने पड़ेंगे और शहर को जाम की समस्या के लिए तैयार रहना होगा।

पार्किंग के स्थायी समाधान के बजाय यूआइटी और नगर निगम की कवायद फाइलों में उलझी नजर आ रही है। नगर निगम चुनाव में यह मुद्दा फिर चर्चा में है। व्यापारियों से लेकर आमजन पार्किंग चाहते हैं। जगह न मिलने के कारण मजबूरी में उन्हें वाहन सड़कों पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं।


ये हैं जाम के प्रमुख पॉइंट

  • नंगली सर्किल से मन्नी का बड़ होते हुए नगर निगम, होप सर्कस, तिलक मार्केट, बजाजा बाजार तक।
  • मन्नी का बड़ से लेकर मनुमार्ग होते हुए ज्योतिबा फुले सर्किल तक।
  • पुलिस कंट्रोल रूम से होप सर्कस होते हुए घंटाघर व रोड नंबर दो तक।
  • नगर निगम के सामने से पूरा केडलगंज बाजार ।
  • भगत सिंह सर्किल से शिक्षा विभाग कार्यालय होते हुए रेलवे स्टेशन तक।

ये बनाए थे प्रस्ताव

  • तांगा स्टैंड की पार्किंग को मैकेनिकल पार्किंग में तब्दील करना था, लेकिन यूआइटी ने जगह कम होने के कारण प्रस्ताव वापस ले लिया।
  • जय कॉम्प्लेक्स में 11 करोड़ की लागत से पार्किंग का प्रस्ताव तैयार हुआ, लेकिन व्यापारियों ने विरोध कर दिया और यूआइटी बैकफुट पर आ गई।
  • कंपनी बाग में डबल बेसमेंट पार्किंग 23 करोड़ से बनाई जानी थी, लेकिन यह प्रस्ताव भी सरकार के पास अटक गया।
  • प्रगति कॉम्प्लेक्स में खाली जगह पर पार्किंग तैयार करनी थी। यह यूआइटी की बेशकीमती योजना है, जिस पर प्रस्ताव लाया गया, लेकिन धड़ाम हो गया।
  • पुरानी तहसील की जमीन पर अस्थायी पार्किंग का संचालन नगर निगम कर रहा है, लेकिन यहां स्थायी पार्किंग बनाने के लिए कदम नहीं उठाए गए।

इनका कहना है

चुनौती के रूप में लेना होगा, तभी पार्किंग बनेगी

अलवर के बाजार में पार्किंग की बहुत ज्यादा जरूरत है। इसके लिए प्रशासन को फिर कवायद करनी चाहिए। जिन जगहों का चयन किया गया था, वहां कमियां निकाली गई, जबकि मजबूत इच्छाशक्ति दिखाते हुए उस प्रोजेक्ट को चुनौती के रूप में लेना चाहिए था। तांगा स्टैंड पर मैकेनाइज पार्किंग बन सकती थी, लेकिन यहां शौचालय बनाकर जगह घेर दी, जबकि यह शौचालय चूड़ी मार्केट के पास खाली जमीन पर बन सकता था। पुरानी तहसील की जमीन का ऑक्शन नहीं हो पाया। वहां भी पार्किंग का संचालन हो सकता है। कंपनी बाग का प्रस्ताव सबसे अच्छा था, लेकिन उसे भी उलझा दिया गया - प्रमोद शर्मा, रिटायर्ड एक्सईएन, यूआइटी

बाजार में कहां-कहां पार्किंग बनाई जा सकती हैं, इसके लिए सर्वे करवाएंगे। जल्द ही रिजल्ट सामने आएंगे - बीना महावर, कार्यवाहक सचिव, यूआइटी