
पिछली सरकार में तीन नई पंचायत समितियां बनाने की योजना की घोषणा की थी. लेकिन अब ये योजनाएं खतरे में पड़ सकती हैं। खबर यह है कि नई सरकार अपनी सीमाओं के आधार पर नई समितियां बनाना चाहती है। वे कुछ नए क्षेत्र जोड़ सकते हैं और शायद कुछ को छोटा भी कर सकते हैं।
वे लोकसभा चुनाव से पहले भी यह प्रस्ताव ला सकते हैं। यह भी हो सकता है कि इन समितियों का गठन केवल वोट प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकार ने थानागाजी क्षेत्र में नारायणपुर, रामगढ़ में साहडोली और कठूमर में भनोखर पंचायत समितियां बनाने की घोषणा की थी।
पूर्ववर्ती सरकार ने कहा था कि इन नई समितियों को सुविधाएं दी जाएंगी। इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा। अब प्रदेश में नई सरकार बनी है। जानकारों का कहना है कि ये प्रस्ताव खटाई में पड़ सकते हैं। नई सरकार अपने मुताबिक समितियों का परिसीमन आदि निर्धारित करेगी। समितियों की घोषणा के बाद ही नई सरकार के कुछ नेताओं ने इस पर सवाल उठाए थे। अब सरकार उनकी है।
ऐसे में समितियों के नामों या परिसीमन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मालूम हो कि जिले में 16 पंचायत समितियां हैं। इनमें अधिकांश पर कांग्रेस के ही प्रधान हैं। नई पंचायत समितियों का गठन हुआ तो वहां भाजपा चाहेगी कि उनके प्रधान बैठें। उसी के अनुसार समीकरण फिट किए जाएंगे। इसका पार्टी को लोकसभा चुनाव में लाभ मिल सकता है।