
Alwar : अलवर. जिस घर में कुछ महीने पहले बेटे की शादी की खुशियां गूंज रही थीं, वहां गुरुवार को मातम पसरा था। जिस मां ने बेटे को दूल्हे के रूप में विदा किया था, उसी मां के सामने जब सेना के जवान तिरंगे में लिपटी बेटे की अस्थियां लेकर पहुंचे तो वह खुद को संभाल नहीं सकी। पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे और जिस पत्नी के हाथों की मेहंदी अभी फीकी भी नहीं पड़ी थी, उसे जिंदगी भर का इंतजार मिल गया। यह दर्दनाक मंजर अलवर के अग्निवीर समुद्र गुर्जर की अंतिम विदाई का था।
अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वैली में 14 अगस्त को हुए भूस्खलन के बाद समुद्र लापता हो गए थे। करीब 80 दिन तक परिवार को उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद बनी रही। 3 नवंबर को सेना ने परिवार को अरुणाचल प्रदेश बुलाकर उनकी पहचान की जानकारी दी। वहीं परिवार ने उनका अंतिम संस्कार भी किया। गुरुवार को उनकी अस्थियां सैन्य सम्मान के साथ अलवर से करीब छह किलोमीटर दूर पैतृक गांव केसरपुर लाई गईं। श्रद्धांजलि यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। वन राज्यमंत्री संजय शर्मा भी समुद्र के आवास पहुंचे और परिवारजनों को ढांढस बंधाया।
ईटाराणा आर्मी कैंप से अस्थियां लेकर सेना के जवान श्रद्धांजलि यात्रा के रूप में अलवर के केसरपुर के लिए रवाना हुए। रास्ते में आसपास के गांवों के लोग भी शामिल होते गए। देशभक्ति के नारों और वंदे मातरम् के उद्घोष के बीच यात्रा गांव पहुंची। गांव के मुख्य स्टैंड पर भारी भीड़ उमड़ी। जेसीबी से पुष्पवर्षा कर अग्निवीर को सम्मान दिया गया। सेना के जवानों ने समुद्र के पिता बदली गुर्जर को तिरंगा और अस्थियां सौंपीं। इसके बाद सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।
समुद्र की मई 2026 में शादी हुई थी। परिवार में खुशियों का माहौल था। रक्षाबंधन से पहले समुद्र छुट्टी लेकर घर आने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की घटना ने परिवार की खुशियां छीन लीं। हादसे में सेना के सात जवान लापता हुए थे, जिनमें दो जवानों को रेस्क्यू कर लिया गया था। समुद्र भी लापता जवानों में शामिल थे। पिता बदली गुर्जर किसान हैं। समुद्र परिवार का इकलौता बेटा था। उनकी दो बहनें हैं।
मेजर रायगोंड चटरक्की ने बताया कि समुद्र जिस इलाके में तैनात थे, वह बेहद दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र है। यहां जवानों को दिन-रात खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के बीच देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। क्षेत्र में बादल फटने और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। समुद्र ऐसे कठिन हालात में भी अपनी ड्यूटी पर डटे रहे। सेना उन्हें पूरे सम्मान के साथ गांव लेकर पहुंची।