
अलवर शहर के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक जयपुर मार्ग पर इन दिनों राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परशुराम सर्किल के पास यूआईटी की ओर से सड़क किनारे इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का काम कराया जा रहा है। लेकिन इस निर्माण कार्य में नियमों और तकनीकी मानकों की ऐसी धज्जियां उड़ाई गईं कि पहली ही बारिश ने विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी। बिना लेवल और ढलान की सही जांच किए जल्दबाजी में टाइल्स लगा दी गईं, जिसका नतीजा अब जलभराव के रूप में सामने आ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह जयपुर मार्ग पीडब्ल्यूडी नेशनल हाईवे (NH) के तहत आता है और इसके दोनों ओर टाइल्स लगाने के लिए कड़े नियम व गुणवत्ता चार्ट तय हैं। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया। जानकारी के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 लाख रुपए का टेंडर जारी हुआ था।
इस काम को 19 जुलाई 2025 तक ही पूरा हो जाना था, लेकिन समय सीमा बीतने के लंबे समय बाद भी यह काम कछुआ रफ्तार से चल रहा है। यही नहीं शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जहां नियम के मुताबिक 4 इंच मोटी पीसीसी (कंक्रीट बेस) डाली जानी थी, वहां ठेकेदार ने महज 2 से 3 इंच की बेस डाली।
गलत लेवलिंग के कारण पिछले एक सप्ताह से सड़क का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है। पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि नई लगाई गईं टाइल्स कई जगहों से नीचे धंस गईं। इस जलभराव की वजह से ब्राह्मण छात्रावास को जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है, जिससे वहां रहने वाले छात्रों और आने-जाने वाले लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। पानी के लगातार जमा रहने से करोड़ों की लागत से बनी मुख्य डामर सड़क भी धीरे-धीरे उखड़ने लगी है और खराब हो रही है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ पुराना काम पानी में डूब चुका है, तो दूसरी तरफ अलवर यूआईटी सड़क के दूसरी ओर भी उसी ढर्रे पर टाइल्स लगाने का काम करवा रही है। लोगों को डर है कि अगर इसकी लेवलिंग ठीक नहीं की गई, तो वहां भी यही हाल होगा। अब यह पूरा मामला जिला कलेक्टर के पास पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों ने कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर मांग की है कि चल रहे निर्माण कार्य की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए, लापरवाही बरतने वाली फर्म पर सख्त कानूनी एक्शन लिया जाए और जलभराव की समस्या का तुरंत स्थाई समाधान निकाला जाए।