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Alwar: पहली बारिश में ही टपका सरकारी स्कूल, 10 कमरों में भरा पानी, बच्चों की सुरक्षा खतरे में

अलवर जिले के थानागाजी ब्लॉक से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के काबलीगढ़ स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में नए सेशन की पहली ही बारिश ने सरकारी दावों की पोल खोल दी। स्कूल के 11 में से 10 कमरों की छतें इस कदर टपकीं कि कमरों में पानी भर गया, जिससे बच्चों की सुरक्षा दांव पर लग गई है।
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thanagazi government school

बारिश का पानी कमरे में टपकता हुआ (फोटो - पत्रिका)

थानागाजी के काबलीगढ़ गांव का सरकारी स्कूल पहली ही हल्की बारिश को झेल नहीं पाया। गुरुवार सुबह हुई बारिश के दौरान स्कूल के लगभग सभी कमरों की छतें झरने की तरह टपकने लगीं। देखते ही देखते 10 कमरों के अंदर पानी जमा हो गया, जिससे बच्चों के बैठने में समस्या हो गई। स्कूल की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है और कोई अनहोनी घट सकती है।

प्रधानाध्यापक ने सूझबूझ से टाला बड़ा हादसा

हालात की गंभीरता को देखते हुए स्कूल के प्रधानाध्यापक रामकिशन खींची ने सूझबूझ दिखाई और बच्चों को तुरंत उन असुरक्षित कमरों से बाहर निकाल लिया। इसके बाद उन्होंने स्कूल स्टाफ और गांव के लोगों को बुलाकर स्कूल की इस बदहाल स्थिति को दिखाया। स्कूल की ऐसी हालत देखकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने हाल ही में झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर समय रहते इस जर्जर भवन को ठीक नहीं किया गया, तो प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है क्या?


ग्रामीणों के विरोध के चक्कर में वापस लौट गया था बजट

हैरानी की बात यह है कि इस स्कूल की किस्मत बदलने के लिए सरकार ने 2 लाख रुपये का बजट मंजूर किया था। ठेकेदार ने छत की मरम्मत का काम शुरू भी कर दिया था, लेकिन कुछ ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री (मटेरियल) की क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया। ठेकेदार ने ग्रामीणों को भरोसा देने की कोशिश की, लेकिन आपसी विवाद इतना बढ़ा कि ठेकेदार अपना सारा सामान समेटकर वहां से चला गया। नतीजा यह हुआ कि काम अधूरा रह गया और सरकारी पैसा वापस सरकार के खाते में लौट गया।

पढ़ाई ठप, कमरों पर लटके ताले

अब इस खींचतान का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रशासन ने फिलहाल जर्जर हो चुके कमरों को सील कर दिया है और उन पर ताले लगा दिए हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चे बैठेंगे कहां और उनकी पढ़ाई कैसे होगी? कमरों की कमी के कारण शिक्षण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्कूल प्रशासन और परेशान ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि राजनीति और विवादों को परे रखकर, बच्चों की जान की खातिर स्कूल की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए और नया निर्माण कार्य शुरू करवाया जाए।