
अलवर जनाना अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद सोमवार दोपहर अस्पताल में हंगामा हो गया। परिजनों ने चिकित्सकों पर समय पर उपचार नहीं करने और ऑपरेशन का निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाया। अस्पताल प्रभारी डॉ. टेकचंद के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई या नहीं।
गोविंदगढ़ कस्बे के सीताराम मंदिर निवासी विशाल ने बताया कि उसकी पत्नी संतोष को प्रसव पीड़ा होने पर 11 अगस्त को जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार चिकित्सकों ने जांच के बाद करीब 13 अगस्त के आसपास प्रसव होने की संभावना जताई थी। इसके चलते परिवार सामान्य प्रसव का इंतजार करता रहा।
विशाल ने अस्पताल में संतोष के इलाज को लेकर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान संतोष को प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन बाद में पीड़ा बंद हो गई। इसके बाद परिजनों ने चिकित्सकों से ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित प्रसव कराने का आग्रह किया। उनका कहना है कि 13 से 16 अगस्त तक ऑपरेशन को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। परिजनों के अनुसार 14 अगस्त को संतोष को हल्का बुखार भी आया था, जो बाद में ठीक हो गया। परिजनों ने पूरे मामले में चिकित्सकीय प्रक्रिया और उपचार को लेकर सवाल उठाते हुए उचित जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रभारी डॉ. टेकचंद ने बताया कि सोमवार को डॉक्टरों की ओर से संतोष के ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान ड्यूटी डॉक्टर ने जांच की तो गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं चल रही थी। इसके बाद सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन कर मृत शिशु को बाहर निकाल लिया।
गर्भस्थ शिशु की मौत की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने डॉक्टरों पर समय रहते उपचार नहीं करने और ऑपरेशन नहीं करने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। अस्पताल स्टाफ ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बच्चे की मौत से दुखी परिवार अपनी नाराजगी जताता रहा। प्रभारी डॉ. टेकचंद ने बताया कि संतोष को टाइफाइड की शिकायत थी और उसका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ था।