
अलवर नगर निगम
अलवर नगर निगम के वार्डों के आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही निकाय चुनाव की सियासत में कई नेताओं के समीकरण बदल गए हैं। निवर्तमान मेयर घनश्याम गुर्जर, अशोक पाठक, अजय पूनिया, सतीश यादव और अरुण जैन के वार्ड आरक्षण की नई व्यवस्था में बदल गए हैं, जिससे इन नेताओं के लिए अपने ही वार्ड से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया है। इनमें से कुछ अपने परिवार की महिलाओं को मैदान में उतारने की तैयारी में हैं, तो कुछ ने नए वार्ड की तलाश शुरू कर दी है। पूर्व सभापति अजय अग्रवाल और बीना गुप्ता समेत नरेंद्र मीणा, धीरज जैन और रमन सैनी के लिए आरक्षण राहत लेकर आया है। इनके वार्ड चुनाव लड़ने के लिहाज से अनुकूल हैं।
घनश्याम गुर्जर: निवर्तमान मेयर का वार्ड 20 अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व हो गया है। वे इस वार्ड से खुद चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। परिवार की किसी महिला को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।
अशोक पाठक: वार्ड 60 ओबीसी के खाते में जाने से मौजूदा वार्ड से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद। दूसरे वार्ड में सियासी जमीन तलाशनी होगी।
अजय पूनिया: वार्ड 48 सामान्य महिला के लिए आरक्षित, खुद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। परिवार की किसी महिला को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं।
सतीश यादव: इनका वार्ड भी अनारक्षित महिला के खाते में चला गया है। परिवार की किसी महिला को प्रत्याशी बनाकर चुनावी समीकरण साध सकते हैं।
रमन सैनी: अनारक्षित महिला के लिए वार्ड आरक्षित, खुद चुनावी मैदान में नहीं उतर सकेंगे। परिवार की किसी महिला को चुनाव मैदान में उतारने या नया वार्ड की तलाश का विकल्प खुला।
अरुण जैन: इनका वार्ड भी एसटी महिला के लिए आरक्षित, नया चुनावी मैदान तलाशना होगा।
अजय अग्रवाल: पूर्व सभापति के वार्ड अनारक्षित रहने से चुनाव लड़ने की राह खुली है।
बीना गुप्ता: वार्ड अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व, चुनाव मैदार में उतरने का रास्ता खुला।
नरेंद्र मीणा: पूर्व कार्यवाहक सभापति के वार्ड का आरक्षण एसटी, चुनाव लड़ने का रास्ता साफ
विक्रम यादव: निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष का वार्ड अनारक्षित श्रेणी में, अपने वार्ड से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
धीरज जैन: निवर्तमान पार्षद का वार्ड अनारक्षित रहने से राहत मिली है। खुद चुनाव लड़ सकते हैं।
Updated on:
18 Aug 2026 11:07 am
Published on:
18 Aug 2026 11:07 am
