
मुस्कान जेल में सुन रही मोहब्बत के नगमे! फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज
Meerut Jail Radio Parwaz: मेरठ जिला जेल में बंदियों के बीच इन दिनों एक अनोखा रेडियो स्टेशन चर्चा का केंद्र बना हुआ है। करीब 3 महीने पहले शुरू हुए इंटरनल रेडियो स्टेशन ‘रेडियो परवाज’ पर बंदियों की फरमाइश के गाने बजाए जाते हैं। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा मांग प्यार और मोहब्बत से जुड़े गीतों की आ रही है।
बंदी अपनी पसंद का गाना एक दिन पहले फरमाइश की पर्ची के जरिए बताते हैं। अगले दिन रेडियो पर उनकी पसंद का गीत बजाया जाता है। जेल प्रशासन के मुताबिक, अलग-अलग मूड के गानों की मांग आती है, लेकिन प्यार और मोहब्बत के नगमों की फरमाइश सबसे ज्यादा रहती है। इनमें 70, 80 और 90 के दशक के फिल्मी गीतों की विशेष मांग है।
जेल में महिला बंदियों की ओर से प्यार और दर्द भरे गानों की फरमाइश भी की जाती है। इसके अलावा मां, बच्चों और परिवार से जुड़े गीतों की मांग भी आती है। जेल प्रशासन के मुताबिक, कई महिला बंदियों के बच्चे जेल से बाहर हैं और वे उनसे मिल नहीं पा रही हैं। ऐसे में परिवार और बच्चों की याद से जुड़े गीत उनके लिए भावनाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम बनते हैं। पति को मारकर नीले ड्रम में भरने वाली मुस्कान भी जेल में मोहब्बत की नगमे सुन रही है। जेल नियमावली के अनुसार बंदी एक-दूसरे से सीधे नहीं मिल सकते। ऐसे में पसंदीदा गीतों के जरिए वे अपनी भावनाओं को जाहिर करने का माध्यम तलाशते हैं।
पुरुष बैरक से भी प्यार, जुदाई, बेवफाई और परिस्थिति से जुड़े गानों की फरमाइश सबसे ज्यादा आती है। जेल में युवा से लेकर अधेड़ उम्र तक के पुरुष बंदी हैं। जेल प्रशासन के अनुसार, कुछ पुरुष बंदी ऐसे भी हैं जो अपनी प्रेमिका के पति की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं। ऐसे बंदियों की ओर से सिचुएशनल गानों की फरमाइश भी आती है।
मेरठ जिला जेल में मई 2026 में ‘रेडियो परवाज’ की शुरुआत की गई थी। ‘परवाज’ का अर्थ ऊंचे विचार रखना होता है। यह उत्तर प्रदेश की जेलों में शुरू किया गया 11वां और इंडिया विजन फाउंडेशन की ओर से बनाया गया 17वां रेडियो स्टेशन है। इंडिया विजन फाउंडेशन की स्थापना डॉ. किरण बेदी ने की है। रेडियो स्टेशन का उद्देश्य जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में काम करना है।
मेरठ जेल में तैयार किया गया रेडियो स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां कंप्यूटर, मिक्सर, सारेगामा कारवां और हाईटेक स्पीकर लगाए गए हैं। रेडियो स्टेशन के इंटीरियर में रजामुराद, संजय दत्त, मोहम्मद रफी, अमिताभ बच्चन और किशोर कुमार के पोट्रेट भी लगाए गए हैं।
बंदियों तक रेडियो की आवाज पहुंचाने के लिए जेल की हर बैरक में स्पीकर लगाए गए हैं। रेडियो का प्रसारण रोजाना सुबह और शाम करीब दो-दो घंटे किया जाता है। बंदी अपनी पसंद के गाने की फरमाइश एक दिन पहले बैरक की सुरक्षा में तैनात सिपाही या जेल स्टाफ को देते हैं। ड्यूटी खत्म होने के बाद ये फरमाइश की पर्चियां रेडियो ऑफिस में पहुंचाई जाती हैं। गानों के अलावा रेडियो पर प्रेरक वार्ता, जीवन कौशल, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और वास्तविक जीवन की परिवर्तनकारी कहानियां भी प्रसारित की जाती हैं।
‘रेडियो परवाज’ पर किसी बंदी की फरमाइश का गाना बजाते समय उसका नाम नहीं बताया जाता। सिर्फ बैरक नंबर का उल्लेख किया जाता है। उदाहरण के तौर पर बताया जाता है कि किसी विशेष बैरक नंबर से किसी फिल्म के किसी गीत की फरमाइश आई है। इस तरह बंदी की पहचान को सार्वजनिक किए बिना उसकी पसंद का गीत बजाया जाता है।
मेरठ जिला जेल में महिला और पुरुष दोनों बंदियों की ओर से गानों की फरमाइश की जाती है। महिलाओं की दो बैरक हैं। एक बैरक में 30 और दूसरी में 31 महिला बंदी हैं। वहीं, पुरुष बंदियों की संख्या करीब 1000 है और एक बैरक में करीब 30 बंदी रहते हैं।
‘रेडियो परवाज’ की एक खास बात यह भी है कि यहां रेडियो जॉकी यानी RJ की जिम्मेदारी एक बंदी संभाल रहा है। संस्था की ओर से पहले उसे RJ की ट्रेनिंग दी गई थी। इसके बाद उसे इन-हाउस RJ के तौर पर प्रशिक्षित किया गया। इस पहल के जरिए बंदियों को अपनी बात रखने और दूसरे बंदियों से संवाद करने का अवसर मिल रहा है। जिन बंदियों को गाने का शौक है, वे स्टूडियो में जाकर माइक पर अपनी आवाज में गीत भी गा सकते हैं।
रेडियो स्टेशन शुरू होने के बाद मेरठ रेंज की यह पहली जेल बताई गई है, जहां इस तरह का रेडियो स्टेशन शुरू किया गया है। जेल प्रशासन के मुताबिक, ‘रेडियो परवाज’ शुरू होने के बाद बंदियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। रोजाना अलग-अलग तरह के गानों की फरमाइश आती है और कई बंदी अपनी बैरक से भी व्यक्तिगत रूप से गीतों की मांग करते हैं।
मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि डॉ. किरण बेदी की संस्था की ओर से जेल में रेडियो स्टेशन शुरू किया गया है। रेडियो पर सुबह और शाम करीब दो घंटे फरमाइशी गीतों का कार्यक्रम प्रसारित होता है। उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन ने रेडियो स्टेशन के लिए जगह उपलब्ध कराई है, जबकि संस्था की ओर से वहां रेडियो का सेटअप तैयार किया गया है।
जेल प्रशासन के मुताबिक, संगीत और सकारात्मक माहौल बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और सुधार की दिशा में मददगार साबित हो सकता है। इसका सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। रेडियो पर धार्मिक गीतों के साथ प्रेरणादायक नगमे, फिल्मी गीत और देशभक्ति के गाने भी बजाए जाते हैं। हालांकि, पुराने फिल्मी गीतों की फरमाइश सबसे ज्यादा आती है।
Updated on:
16 Aug 2026 04:54 pm
Published on:
16 Aug 2026 04:54 pm
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