14 अगस्त 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Lalita Gautam Murder: SSP अविनाश पांडे समेत 250 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश जारी, मेरठ की छात्रा के केस में अपडेट

Lalita Gautam Murder Case Update: मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मामले की अब DIG स्तर से जांच होगी। न्यायालय ने एसएसपी समेत करीब 250 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दाखिल परिवाद को गंभीरता से लिया है।
2 min read
Google source verification

मेरठ

image

Harshul Mehra

Aug 14, 2026

investigation orders issued against meerut ssp avinash pandey lalita gautam murder

ललिता गौतम हत्याकांड अपडेट। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Lalita Gautam Murder Case Update Meerut: यूपी के मेरठ में छात्रा ललिता गौतम की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों और अधिवक्ताओं पर कथित पुलिस कार्रवाई का मामला अब न्यायालय की निगरानी में पहुंच गया है। SSP मेरठ अविनाश पांडे समेत करीब 250 पुलिसकर्मियों के खिलाफ दाखिल परिवाद को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने मामले की जांच DIG स्तर के अधिकारी से कराने के आदेश दिए हैं।

8 जुलाई को कलेक्ट्रेट पहुंचे थे प्रदर्शनकारी

मामला 8 जुलाई का है। ललिता गौतम की हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग मेरठ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अधिकारियों को ज्ञापन देने और जिलाधिकारी से मुलाकात करने के लिए वहां पहुंचे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को जिलाधिकारी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद नाराज लोग कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए।

कलेक्ट्रेट का गेट बंद करने का आरोप

इस मामले में अधिवक्ता रवि कुमार गौतम और महेश कुमार की ओर से न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर प्रदर्शनकारियों को अधिकारियों से मिलने से रोक दिया गया। परिवाद में कहा गया कि कुछ समय बाद SSP भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शन में शामिल महिलाओं और पुरुषों के साथ अभद्रता की गई। साथ ही गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया।

पुलिस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल

परिवादियों की ओर से अधिवक्ता अनिल प्रधान ने न्यायालय में अलग से प्रार्थना पत्र दाखिल कर मामले की जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि आरोप स्थानीय सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर लगाए गए हैं। ऐसे में उसी थाने से जांच आख्या मंगाना निष्पक्ष नहीं होगा।

वरिष्ठ अधिकारी से जांच की मांग

अधिवक्ता की ओर से न्यायालय से मांग की गई कि मामले की जांच स्थानीय थाने के बजाय किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए। इस मांग और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने इसे गंभीरता से लिया और DIG स्तर के अधिकारी को जांच करने के निर्देश दिए।

DIG जांच में सामने आएगी पूरी तस्वीर

अब DIG स्तर की जांच में यह स्पष्ट होगा कि 8 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या परिस्थितियां बनी थीं और पुलिस पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।