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alwar kashmir pandit news कश्मीरी पंडित बोले- इस जीवन में पूरी होगी धरती के स्वर्ग में जाकर बसने की आरजू

जम्मू कश्मीर को alwar kashmir pandit news विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दो केन्द्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले पर कश्मीर विस्थापित परिवारों ने जताई खुशी
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Aug 06, 2019
alwar kashmir pandit news
alwar kashmir pandit news कश्मीरी पंडित बोले- इस जीवन में पूरी होगी धरती के स्वर्ग में जाकर बसने की आरजू

अलवर. दशकों पहले धरती के स्वर्ग कश्मीर alwar kashmir pandit news से जुदाई का दंश झेल रहे कश्मीर पंडित केन्द्र सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर सोमवार को संसद में किए गए ऐलान से बेहद खुश दिखे। अलवर के समीप छोटे से गांव बल्लाना व दादर में बसे कश्मीर पंडितों का कहना है कि हमें जीते जी धरती के स्वर्ग जाने की इच्छा है, केन्द्र सरकार के ऐलान के बाद अब उनकी उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

हिन्दुस्तान की आजादी और उसके बाद अपनी मातृभूमि कश्मीर को छोडऩे को मजबूर हुए कश्मीरी पंडितों alwar kashmir pandit news के दर्जनों परिवार रोजी-रोटी की जुगत में अलवर जिले में आ बसे। वर्तमान में ये कश्मीर विस्थापित परिवार अलवर के बल्लाना, दादर, अकबरपुर, अहमदपुर, चांदपहाड़ी, तसी, विजयमंदिर व अलवर शहर में बसे हैं। इनमें से ज्यादातर पाक अधिकृत कश्मीर के बेडी ब्रह्मपुरा गांव के रहने वाले हैं। इनमें बल्लान गांव में वर्तमान में 15-20 परिवार बसे हैं। इन परिवारों का कहना है कि वर्ष 1952 में सात परिवार यहां आकर बसे। वर्तमान में यहां रहने वाले कश्मीरी पंडितों के परिवारों की संख्या बढकऱ करीब 20 हो गई है।

बल्लाना में बसे कश्मीरी पंडितों alwar kashmir pandit news का कहना है कि दशकों से उनके परिवार यहां बसे हैं, लेकिन आज भी मन धरती के स्वर्ग कश्मीर में अटका है। परिवारों के सदस्यों का जम्मू-कश्मीर में रिश्तेदारों के यहां आना-जाना रहता है। वर्ष 2000 के बाद ही इन परिवारों में 18 युवकों की शादी जम्मू कश्मीर की युवतियों से हुई है। इन परिवारों का मानना है कि जम्मू कश्मीर से उनका अटूट रिश्ता है और ठंडे प्रदेश को छोडकऱ आने का दर्द अब तक उनके दिल में है। यही कारण है कि वर्ष 1955-60 में कश्मीर से आए कई परिवार यहां के गर्म मौसम को देख वापस कश्मीर लौट गए। अब केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य के विशेष दर्जे को खत्मकर दो केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर व लद्दाख बनाने का निर्णय किया है। केन्द्र सरकार का यह फैसला प्रशंसनीय है। इस फैसले से उन्हें अपार खुशी हुई है, कल से ही इस ऐतिहासिक फैसले का इंतजार था, इस कारण सुबह से ही टीवी के आगे बैठ गए। जैसे ही संसद में केन्द्र के गृह मंत्री ने जम्मू कश्मीर को लेकर ऐलान किया, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे केन्द्र सरकार के फैसले से बेहद खुश हैं।

दिल में चाहत थी जम्मू अलग प्रदेश बने

कश्मीर विस्थापित परिवार के सदस्य ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि लंबे समय से दिल में चाहत थी कि जम्मू अलग प्रदेश बने, आज केन्द्र सरकार ने यह चाहत पूरी कर दी। केन्द्र के इस कदम से जम्मू कश्मीर में अलगाववाद का खात्मा हो सकेगा। उन्होंने केन्द्र के फैसले को ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि इससे खुशी का माहौल है। हालांकि यह फैसला लेना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन सरकार ने असंभव को संभव कर दिया। शर्मा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में अभी हालात सामान्य नहीं है, इस कारण अभी वहां जाकर रहना संभव नहीं है, लेकिन हालात सामान्य होने और सरकार विस्थापित परिवारों को रहने व रोजगार की सुविधा मुहैया कराए तो वे वापस लौटने को तैयार हैं। उन्होंने आशा जताई कि एक दिन उनकी यह उम्मीद भी पूरी होगी और जीते जी उनकी धरती के स्वर्ग कश्मीर में लौटने की इच्छा भी पूरी होगी।

ऐसा ही दृढ़ निश्चय दिखाया तो पीओके भी हमारा होगा

कश्मीरी विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने केन्द्र सरकार के कदम को दृढ़ निश्चय वाला बताया और कहा कि यही दृढ़ इच्छा दिखाई तो पाक अधिकृत कश्मीर भी जल्द ही हमारा होगा।

केन्द्र के फैसले से मिल सकेंगे अधिकार

बल्लाना गांव के ज्यादातर कश्मीरी पंडित सदस्यों का मानना था कि केन्द्र के फैसले से उन्हें अपने अधिकार मिलने की उम्मीद जगी है। जम्मू कश्मीर में नया कानून बनने पर महिलाओं को अपने अधिकार मिल सकेंगे। अब तक जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा मिलने के कारण कश्मीरी पंडितों का दर्द था कि वे भारत में रहते हुए भी अपने वतन नहीं जा सकते थे, लेकिन अब जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने की घोषणा से वे अपने प्रदेश में जा सकेंगे।

आजादी के समय रही कमी अब हुई पूरी

जम्मू कश्मीर पर केन्द्र फैसले को लेकर कश्मीर विस्थापित परिवारों का कहना था कि हिन्दुस्तान की आजादी के समय रही कमी अब पूरी हुई है। उनका कहना था कश्मीर को असल आजादी केन्द्र के फैसले से मिली है। अब उन्हें महसूस हुआ कि कश्मीर हमारा है।

वतन छूट गया, लेकिन मातृभाषा की विरासत बचाकर रखी

विस्थापित कश्मीर पंडितों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि भारत-पाक बंटवारे के बाद युद्ध के हालात में उन्हें अपनी मातृभूमि को छोडकऱ यहां बसना पड़ा, लेकिन इस बात की खुशी है कि उनकी मातृ भाषा पुंछी की विरासत को अब भी सहेजकर रखा हुआ है। गांव में परिवारों के सदस्य आज भी पुंछी भाषा में बात करते हैं। इतना ही नहीं कभी कश्मीर से आने वाले लोगों से मुलाकात होती है तो भी पुंछी भाषा में ही वार्तालाप करते हैं। इससे उन्हें कश्मीर से अपनत्व का अहसास होता है।

खुशी इतनी कि मन में न समाए, इस बार लाल चौक पर तिरंगा फहराए

कश्मीर से विस्थापित परिवारों ने केन्द्र के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें इतनी प्रसन्नता हुई कि मन में नहीं समा रही। साथ ही इससे भी बड़ी खुशी की बात यह है कि इस बार कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराएगा। जम्मू कश्मीर पर किए फैसले को लेकर बुजुर्ग भी स्वर्ग से फूल बरसा रहे होंगे। विस्थापित कश्मीरी सदस्यों का कहना था कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 व 35 ए हटना जरूरी था। इस फैसले से हमारा देश का जुड़ाव सभी जगहों से हो गया।

किसी देश में हिम्मत नहीं कि फैसले पर टोकाटाकी करे

कश्मीरी पंडित परिवारों का कहना था पहले कश्मीर पर कोई बात होते ही विदेशों से टोकाटाकी होने लग जाती थी, लेकिन इस बार विशेष बात यह रही कि केन्द्र ने इतना बड़ा फैसला किया और किसी भी देश की हिम्मत नहीं कि फैसले पर टोकाटाकी कर सके।

याद आते हैं सेब के पेड़, वादियों की मस्ती

दादर गांव में कश्मीरी पंडित परिवार की बुजुर्ग महिला विमला देवी ने बताया कि उन्हें कश्मीर में सेब से लदे पेड़ अब भी याद आते हैं। वादियों में घूमने फिरने का आनन्द मन को झकझोर जाता है। उन्होंने कश्मीर से विस्थापन का दर्द बयां करते हुए कहा कि जब कश्मीर छोडऩे की बात याद आती है तो गदर की याद ताजा हो जाती है। उस दौरान कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से मारपीट कर निकाला गया। अब सरकार ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने का फैसला किया है, इससे उन्हें खुशी हुई है। कश्मीरी विस्थापित परिवार की एक अन्य बुजुर्ग महिला कांता देवी ने कहा कि इस फैसले के बाद उनके वहां फिर से राशन कार्ड बन सकेंगे। बच्चों को फायदा मिल सकेगा, नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कश्मीर सदैव भारत का हिस्सा रहा और पाकिस्तान इसे कभी नहीं ले सकता। हमारे सैनिक सीमा पर तैनात है।

जो कहा वो आज पूरा कर दिखाया

बुजुर्ग महिला कांता देवी ने एक वाकये का जिक्र कर कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान वह अपने रिश्तेदार के यहां जम्मू गई थी। उस दौरान सुंदरबनी में एक चुनावी सभा में अमित शाह ने भाषण में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने की बात कही थी। आज जैसे ही केन्द्र सरकार के फैसले की बात सुनी उनकी याद ताजा हो गई। उन्होंने कहा कि भाषण सुनने के दौरान ही उन्हें विश्वास था कि एक दिन कश्मीर से धारा 370 जरूर हटेगी।

Published on:
06 Aug 2019 06:00 am