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Narayanpur: अघोषित बिजली कटौती से भड़के ग्रामीण, देर रात बिजली दफ्तर पहुंचे 

नारायणपुर क्षेत्र में बिना किसी पूर्व सूचना के हो रही लगातार बिजली कटौती से तंग आकर ग्रामीण और किसान देर रात बिजली दफ्तर पहुंच गए। दिन और रात दोनों वक्त बिजली गुल रहने से खेती-किसानी और घरेलू काम बुरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे नाराज ग्रामीणों ने सीधे अधिकारियों से जवाब मांगा।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 4 Sep 2026, 2:14 PM IST

narayanpur unannounced power cut

बिजली दफ्तर पहुंचे ग्रामीण (फोटो - पत्रिका)

नारायणपुर और आसपास के गांवों में पिछले कई दिनों से अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। न बिजली आने का कोई समय तय है और न ही जाने का। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों बिजली गुल रहने से आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। दिनभर बिजली की आंख-मिचौली चलती है और रात होते ही बत्ती पूरी तरह गुल हो जाती है। इस मनमानी से परेशान होकर आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और बड़ी संख्या में किसान व ग्रामीण देर रात सीधे नारायणपुर बिजली विभाग के कार्यालय पहुंच गए।

किसानों को भी हो रही परेशानी

दफ्तर पहुंचे ग्रामीणों ने वहां मौजूद अधिकारियों के सामने अपनी भड़ास निकाली। लोगों का साफ कहना था कि विभाग बिना किसी पूर्व सूचना के जब चाहे तब सप्लाई बंद कर देता है। इस अघोषित कटौती ने सबसे ज्यादा चोट किसानों पर की है। इस समय खेतों में फसलों को पानी की सख्त जरूरत है। सिंचाई के लिए किसानों को नलकूप चलाने होते हैं, लेकिन पर्याप्त और स्थिर बिजली न मिलने के कारण पंप नहीं चल पा रहे हैं। किसानों को डर सता रहा है कि अगर समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो उनकी महीनों की मेहनत और लाखों रुपये की फसल सूख कर बर्बाद हो जाएगी।

क्षेत्रवासी हो रहे परेशान

मौके पर मौजूद किसान राकेश दायमा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा पूरे इलाके को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिन में तो काम प्रभावित होता ही है, रात को बिजली कटने से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और बुजुर्ग चैन की नींद नहीं सो पा रहे। घरों में पानी की मोटर तक नहीं चल पाती, जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाता है। किसानों को आधी रात को खेतों में पानी लगाने की उम्मीद में जागना पड़ता है, लेकिन बिजली दगा दे जाती है।


ग्रामीणों के विरोध और नाराजगी को देखते हुए बिजली विभाग के अधिकारियों ने मामले को शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों ने ग्रामीणों की पूरी बात ध्यान से सुनी और भरोसा दिलाया कि आगे से इस तरह की बेवजह बिजली कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने जल्द से जल्द क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को सुचारू और नियमित बनाने का आश्वासन दिया।

हालांकि, अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीण शांत तो हो गए, लेकिन उन्होंने दो टूक चेतावनी भी दे डाली। ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल आश्वासन के भरोसे नहीं बैठेंगे। यदि अगले कुछ दिनों में बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी और मनमानी कटौती बंद नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। इसके बाद किसान और ग्रामीण मिलकर बिजली दफ्तर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।