
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिवंगत नेता महेंद्र शास्त्री को दी श्रद्धांजलि (फोटो - पत्रिका)
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शुक्रवार को अलवर पहुंचे। यहां उन्होंने मुंडावर के पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेंद्र शास्त्री के मोती डूंगरी स्थित आवास पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। महेंद्र शास्त्री का 27 अगस्त 2026 को 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। जगदीप धनखड़ ने श्रद्धांजलि देने के बाद महेंद्र शास्त्री के लंबे सार्वजनिक जीवन और समाज के लिए किए गए कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री ने कई दशकों तक समाज की सेवा की और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
धनखड़ ने कहा कि महेंद्र शास्त्री ने राजस्थान में सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सहकारी संस्थाओं और सहकारी बैंकों के संचालन को मजबूत करने के लिए उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। उन्होंने कहा कि आज देश में सहकारिता को संविधान में प्रमुख स्थान मिलने और इसके लिए अलग मंत्रालय बनने के पीछे ऐसे नेताओं के लंबे समय तक किए गए प्रयासों की मजबूत नींव रही है।
पूर्व उपराष्ट्रपति ने सामाजिक न्याय और OBC आरक्षण आंदोलन में महेंद्र शास्त्री की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जाट समाज सहित पांच अन्य जातियों को राज्य और केंद्र स्तर पर OBC आरक्षण दिलाने के लिए चलाया गया आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इसमें सफलता मिली। इस आंदोलन में राजाराम मील और डॉ. हरि सिंह के साथ महेंद्र शास्त्री भी आंदोलन समिति के प्रमुख चेहरों में शामिल थे।
धनखड़ ने विद्याधर नगर में आयोजित उस सम्मेलन का भी जिक्र किया, जिसमें कांशीराम और आरिफ अनवर जैसे नेता शामिल हुए थे। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता की एक बड़ी मिसाल बताया। उनका कहना था कि अलग-अलग वर्गों और समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक न्याय की मांग को मजबूत किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 25 वर्षों में OBC आरक्षण से समाज के कई वर्गों में बड़ा बदलाव आया है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिले हैं। इस बदलाव के पीछे महेंद्र शास्त्री जैसे नेताओं का निष्ठावान संघर्ष और योगदान रहा है।
धनखड़ इससे पहले जून 2026 में भी अपनी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़ के साथ अलवर आए थे। उस दौरान उन्होंने महेंद्र शास्त्री के मोती डूंगरी स्थित आवास पर पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। शास्त्री के निधन के बाद शुक्रवार को धनखड़ ने एक बार फिर अलवर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके सामाजिक व राजनीतिक योगदान को याद किया।
Updated on:
04 Sept 2026 01:47 pm
Published on:
04 Sept 2026 01:47 pm
