
अलवर के बगड़ राजपूत गांव में केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्यमंत्री राम नाथ ठाकुर ने 'खेत बचाओ अभियान' की शुरुआत की। मंत्री ठाकुर ने कृषि गोष्ठी में किसानों को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के सपने को पूरा करने के लिए 'स्वस्थ खेत और स्वस्थ शरीर' सबसे जरूरी हैं। इसी सोच के साथ 1 जून से देशभर में 'खेत बचाओ अभियान' शुरू किया गया है, जो 30 जून तक चलेगा।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों (केमिकल खादों) के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी जमीनें बंजर हो रही हैं, जिससे पैदा होने वाला अनाज इंसानी सेहत को बीमार बना रहा है। अब वक्त आ गया है कि हम वैज्ञानिक तरीके से केमिकल का उपयोग धीरे-धीरे बंद करें और अपनी पुरानी प्राकृतिक खेती की पद्धति पर वापस लौटें।
केंद्रीय मंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को केवल जागरूक न करें, बल्कि उन्हें पारंपरिक खेती से जोड़ने में वैज्ञानिक मदद भी दें। उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उन तक समय पर पहुंचाया जाए। साथ ही, उन्होंने किसानों से खेती के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और एफपीओ (FPO) जैसी सह-कृषि गतिविधियां अपनाने का आह्वान किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
गोष्ठी में मौजूद रामगढ़ विधायक सुखवंत सिंह ने किसानों से अपनी मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्ट) कराने की अपील की। उन्होंने बताया कि राजस्थान में 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' के तहत अब किसानों को सालाना 9 हजार रुपये मिल रहे हैं, जिसमें 6 हजार रुपये केंद्र सरकार और 3 हजार रुपये राज्य सरकार दे रही है। इसके अलावा, जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. पुष्पेंद्र सिंह चौहान और अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जे.पी. मिश्रा ने भी किसानों को इस अभियान के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पी.सी. मीना ने बताया कि अलवर जिले में इस अभियान के पहले चरण के लिए ऐसी 100 ग्राम पंचायतों को चुना गया है, जहां रासायनिक खादों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। इन गांवों में सघन रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जिले में साल 2016 से 'पारंपरिक कृषि विकास योजना' चल रही है, जिसके तहत नेचुरल फार्मिंग के 34 क्लस्टर बनाकर किसानों को लगातार प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है।