अलवर

मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से अलवर की कांग्रेस राजनीति में बढ़ी हलचल

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दिल्ली दौरे से अलवर जिले की कांग्रेस राजनीति में भी हलचल बढऩे के साथ ही एक से दो विधायकों को मंत्री मिलने की अटकलें शुरू हो गई हैं।

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Nov 10, 2021
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से अलवर की कांग्रेस राजनीति में बढ़ी हलचल

अलवर. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दिल्ली दौरे से अलवर जिले की कांग्रेस राजनीति में भी हलचल बढऩे के साथ ही एक से दो विधायकों को मंत्री मिलने की अटकलें शुरू हो गई हैं। जिले में कांग्रेस के 7 व दो समर्थित निर्दलीय विधायक हैं और अभी जिले से एक मात्र कांग्रेस विधायक स्वतंत्र राज्य मंत्री हैं।

राज्य सरकार के लंबित मंत्रिमंडल विस्तार की आस जल्द पूरी होने की आस फिर जगी है। कोरोना संक्रमण कम होने के बाद मुख्यमंत्री की दिल्ली में सक्रियता बढऩे से कांग्रेस व समर्थित निर्दलीय विधायकों को उम्मीद है कि नवम्बर महीने में मंत्रिमंडल के विस्तार की तैयारी है। यही कारण है कि जिले के कांग्रेस व समर्थित निर्दलीय विधायकों ने फिर से मंत्री पद के लिए लॉबिंग शुरू कर दी है।

अलवर जिले से एक से दो मंत्री बनने की उम्मीद

राजनीतिक तौर पर अलवर जिला प्रदेश में महत्वपूर्ण होने के कारण मंत्रिमंडल विस्तार में अलवर का प्रतिनिधित्व बढऩे की संभावना है। कांग्रेस के जानकारों का मानना है कि अलवर जिले से दो और विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है, इनमें एक कांग्रेस कोटे एवं एक बसपा से कांग्रेस में आए कोटे से विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं समर्थित निर्दलीय विधायकों को भी सत्ता में समायोजित किया जा सकता है।

वरिष्ठता पड़ सकती है भारी

मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए वैसे तो जिले के ज्यादातर कांग्रेसी व निर्दलीय विधायक प्रयासरत हैं, लेकिन विधायकों की वरिष्ठता नए विधायकों पर भारी पड़ सकती है। कांग्रेस कोटे से बानसूर विधायक शकुंतला रावत व बसपा से कांग्रेस में आए विधायकों में किशनगढ़बास विधायक दीपचंद खैरिया अन्य विधायकों पर भारी साबित हो सकते हैं। वहीं पंचायती राज चुनाव में कांग्रेस की सफलता में इन विधायकों के प्रयास को भी तरजीह मिलने की संभावना है। बानसूर में पंचायत समिति सदस्यों के परिणाम में पिछडऩे के बाद भी स्थानीय विधायक के प्रयास रंग लाए और यहां कांग्रेस का प्रधान निर्वाचित हुआ। वहीं किशनगढ़बास की दोनों पंचायत समितियों में स्थानीय विधायक कांग्रेस के प्रधान निर्वाचित कराने में कामयाब रहे।

संसदीय सचिव पर भी विधायकों की नजर

कांग्रेस, बसपा से कांग्रेस में आए तथा समर्थित निर्दलीय कई विधायकों की नजर संसदीय सचिव पर भी टिकी हैं। इस पद के लिए ज्यादातर वे विधायक प्रयासरत हैं, जिनको मंत्रिमंडल में जगह मिल पाने की उम्मीद कम है।

कांग्रेस की दूसरी लाइन के नेता भी उत्साहित

मंत्रिमंडल की सुगबुगाहट के साथ ही कांग्रेस की दूसरी लाइन के नेता भी उत्साहित हैं। कारण है कि मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद ही राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता खुल सकेगा। कांग्रेस में कई नेता यूआईटी, राज्य स्तरीय बोर्ड, निगम एवं समितियों में जगह पाने के लिए लालायित हैं। जिले में दो यूआईटी हैं और इनमें अब तक चेयरमैन की नियुक्ति नहीं हुई है। कांग्रेस के कई नेता यूआईटी चेयरमैन सीट पर नजर लगाए हुए हैं। वहीं राज्य स्तरीय मेवात विकास बोर्ड, जिला स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में उपाध्यक्ष, जन अभाव एवं सतर्कता समिति, क्रीड़ा परिषद एवं अन्य समितियों में जगह पाने की उम्मीद बांधे हैं।

Published on:
10 Nov 2021 11:54 pm
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