लोगों की आवासीय पट्टों की सालों पुरानी उम्मीदों को साकार करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री से लेकर आला अधिकारियों ने तीन दिन अलवर में डेरा डाल पूरे प्रदेश का सस्ते पट्टे दिलाने की दिशा दिलाई, लेकिन अलवर में देरी से शुरू हुए प्रशासन शहरों के संग एवं प्रशासन गांवों के संग अभियान के शिविरों में सरकार के ये प्रयास लोगों को ज्यादा राहत दिलाते नजर नहीं आए।
अलवर. लोगों की आवासीय पट्टों की सालों पुरानी उम्मीदों को साकार करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री से लेकर आला अधिकारियों ने तीन दिन अलवर में डेरा डाल पूरे प्रदेश का सस्ते पट्टे दिलाने की दिशा दिलाई, लेकिन अलवर में देरी से शुरू हुए प्रशासन शहरों के संग एवं प्रशासन गांवों के संग अभियान के शिविरों में सरकार के ये प्रयास लोगों को ज्यादा राहत दिलाते नजर नहीं आए। अभियान के जिले में शिविर लगते एक सप्ताह का समय बीत गया, लेकिन जिले में अब तक पूरे पांच हजार भी पट्टे नहीं बांट पाए। यह स्थिति तो तब है जब जिले में राजस्व गांवों की संख्या दो हजार के पार है।
पंचायती राज चुनाव के चलते अलवर में गांधी जयंती पर गत दो अक्टूबर से प्रदेश के अन्य जिलों के साथ प्रशासन शहरों के संग अभियान एवं प्रशासन गांवों के संग अभियान शुरू नहीं हो सके। पंचायती राज चुनाव खत्म होने के बाद जिले में इसी माह 8 नवम्बर से प्रशासन शहरों के संग एवं 9 नवम्बर से प्रशासन गांवों के संग अभियान के शिविर शुरू हो पाए। अलवर जिले में अभियान के शिविर लगते एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन लोगों की भूमि के आवासीय पट्टे मिलने की आस अभी अधूरी है।
प्रशासन गांवों के संग अभियान में पट्टों की रफ्तार धीमी
प्रशासन गांवों के संग अभियान के जिले के सभी ब्लॉकों में प्रतिदिन एक ग्राम पंचायत में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन गत 16 नवम्बर तक पूरे जिले में मात्र 3556 आवासीय पट्टे ही वितरित हो सके हैं। यानि एक सप्ताह के शिविरों में एक ग्राम पंचायत में औसतन 6 से 7 पट्टे ही वितरित किए जा सके हैं। जबकि एक राजस्व गांव में औसतन एक से डेढ़ पट्टे ही एक सप्ताह में शिविरों में बांटे जा सके हैं।
प्रशासन शहरों के संग अभियान में भी पट्टों का इंतजार
प्रशासन शहरों के संग अभियान के शिविरों में लोगों को अपनी जमीन के आवासीय पट्टे मिलने का इंतजार है। शहर में यूआईटी व नगर परिषद की ओर से अलग- अलग स्थानों पर शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों को लगते एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन दोनों ही संस्था मिलकर गत 17 नवम्बर तक करीब 820 आवासीय पट्टे ही वितरित कर पाई हैं। इसमें यूआईटी ने 650 तथा नगर परिषद ने 170 पट्टे ही जारी किए हैं। जबकि यूूआईटी का लक्ष्य अभियान में 10 हजार पट्टे बांटने का है।
सरकार ने हटाई बाधाएं, लेकिन काम नहीं आई
राज्य के स्वायत्त शासन विभाग का पूरा अमला अलवर के एक होटल में रुक तीन दिन तक प्रशासन शहरों के संग अभियान में आसानी से पट्टा वितरण के लिए नियमों में सरलीकरण करता रहा। उस दौरान यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, प्रमुख शासन सचिव कुंजीलाल मीणा सहित अन्य बड़े से लेकर छोटे अधिकारी यहां मौजूद रहकर पट्टा वितरण में आने वाली परेशानी की जानकारी लेकर नियमों में सरलीकरण का ड्राफ्ट बनाते रहे। अलवर सहित प्रदेश के ज्यादातर जिलों से मिले सुझाव के आधार पर पट्टा वितरण के नियम बनाए गए, लेकिन अभियान शुरू होने पर सरकार की यह कवायद कारगर नजर नहीं आई।
पट्टों की कम प्रगति रही तो होगी कार्रवाई
प्रशासन गांवों के संग एवं प्रशासन शहरों के संग अभियान में आवासीय पट्टों की प्रगति कम रहने पर सम्बन्धित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी सम्बन्धित अधिकारियों को अभियान में अपनी प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
नन्नूमल पहाडिय़ा
जिला कलक्टर अलवर