
अलवर. रकबर की मौत के मामले में रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि वह पहले दिन से कह रहे थे कि रकबर की मौत पुलिस कस्टडी मेें हुई है। अब गृहमंत्री ने भी इसे माना है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा से कहते हैं कि गोतस्करों को मारना नहीं है। केवल दो-चार थप्पड़ मारना और पेड़ से बांध देना। इसके बाद पुलिस को सूचना दे देना। ललावंडी में ग्रामीणों ने गोतस्करों को दो-चार थप्पड़ मारे। रकबर की मौत ग्रामीणों की मारपीट से नहीं बल्कि पुलिस की पिटाई से हुई है। पुलिस ने उसे घटनास्थल पर पीटा। इसके बाद थाने में लात-घूंसों से पीटा। जब उसकी हालत खराब होने लगी, तो उसे हॉस्पिटल लेकर भागे।
अब पुलिस अपनी गलती छिपाने के लिए निर्दोष लोगों को फंसा रही है। धर्मेन्द्र व परमजीत को पुलिस ने गोतस्कर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की कहकर थाने बुलाया था। बाद में उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया। उन्होंने कहा कि मामले में गिरफ्तार तीनों लोग निर्दोष हैं। मामला तो रकबर के साथी असलम के खिलाफ दर्ज होना चाहिए।
पुलिस की शह से पनप रही गोतस्करी
आहूजा ने आरोप लगाया कि जिले में पुलिस की शह से गोतस्करी पनप रही है। पुलिस की सबसे मंथली सैट है। पुलिस की अवैध डम्परों, अवैध माइन्स, अवैध दूध से कमाई होती है। इस कमाई से सिपाही को तो केवल दस परसेन्ट मिलता है। बाकी का ऊपर के अधिकारियों को जाता है। जब-जब हमने पुलिस से शिकायत की, उनके बारे-न्यारे हो गए। उन्होंने कहा कि राजस्थान के गोवंश को लेकर कानून बना हुआ है। इसे यूं ही कोई नहीं ले जा सकता। एसीबी छोटी-छोटी मछलियों के खिलाफ तो कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े मगरमच्छों को छोड़ देती है। रकबर मामले में भी ऐसा हो रहा है। एएसआई व तीन सिपाहियों पर तो कार्रवाई हो गई, लेकिन बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।