
अलवर. रामगढ़ के ललावंडी में मॉब लिचिंग की घटना के दौरान मौके से बरामद दोनों में से एक भी गाय दुधारु नहीं है। न ही वे बड़ौदामेव के लाडपुर से खरीदकर लाई गई। ये दोनों ही पहलु मृतक के परिजनों के बयान और पुलिस की एफआईआर पर संदेह पैदा करते हैं। पत्रिका टीम मंगलवार को सुधासागर गौशाला और लाडपुर गांव पहुंची। जहां ये दोनों बड़े सच सामने आए।
21 जुलाई की रात ललावंडी गांव में गोतस्करी के शक में भीड़ ने कोलगांव-हरियाणा निवासी रकबर को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। घटना की सूचना के बाद पुलिस देर रात मौके पर पहुंची। पुलिस मौके से रकबर और दोनों गायों को रामगढ़ थाने ले आई। रात करीब साढ़े तीन बजे दोनों गायों को थाने से सात किलोमीटर दूर सुधासागर गोशाला में छुड़वा दिया। इसके बाद घायल रकबर की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई।
घटना के बाद दर्ज एफआईआर में पुलिस ने बताया कि पुलिस पूछताछ में रकबर ने बताया कि वह और उसका साथी असलम बड़ौदामेव के लाडपुर से दो दुधारु गायें खरीदकर ललावंडी के रास्ते से कोलगांव ले जा रहे थे। वहीं, मृतक रकबर के परिजनों का भी कहना है कि रकबर और असलम लाडपुर के मल्ला और सुन्ने खां के घर से दुधारु गायें खरीदकर ला रहे थे, लेकिन ललावंडी से बरामद कर पुलिस द्वारा सुधासागर गोशाला में छोड़ी दोनों में से एक भी एक दुधारु नहीं है। वहीं, मल्ला और सुन्ने खां के परिजनों का कहना है कि उन्होंने कोई गाय नहीं बेची।
मैंने स्वयं बगड़ तिराया स्थित सुधासागर गौशाला में जाकर रकबर खां से बरामद गायों को देखा। उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया तो एक गाय देशी जिसकी उम्र करीब चार साल व एक होलेस्टन गाय जिसकी उम्र करीब छह साल है। गाय काफी कमजोर तथा दूध देने में असमर्थ थी यानि दुधारु नहीं थी। - डॉ.सीताराम वर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सालय रामगढ़।