
अलवर नगर निगम के मेयर का चुनाव पार्षदों के वोट से होना है। ऐसे में मेयर पद के टिकट को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल आखिरी समय में चौंकाने वाला फैसला कर सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों दल किसी नए और अपेक्षाकृत गैर-विवादित चेहरे को मैदान में उतारकर सभी को चौंका सकते हैं। पिछले चुनाव में भी दोनों प्रमुख दलों ने मेयर पद के लिए चौंकाने वाले नाम सामने रखे थे।
इससे पहले वर्ष 2009 में पहली बार नगर परिषद सभापति का सीधा चुनाव जनता की ओर से कराया गया था। उस समय भाजपा ने महिला उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाकर चौंकाया था। वह जिले की राजनीति में अपेक्षाकृत नया नाम था। वर्ष 2014 में भी भाजपा ने रिटायर्ड अधिकारी को टिकट देकर राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी थी। यही वजह है कि इस बार भी दोनों दलों के संभावित प्रत्याशियों को लेकर अटकलों का दौर तेज है।
राजनीतिक दल ऐसे चेहरे को प्राथमिकता देने की तैयारी में हैं जो पार्षदों के बीच स्वीकार्य हो और जिस पर ज्यादा विवाद न हो। पार्टी के लिए जरूरी होगा कि उसका प्रत्याशी चुनाव जीतने के बाद पार्षदों का पर्याप्त समर्थन भी जुटा सके। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को देखें, तो अचानक नए नाम सामने आने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। हाल ही में सरस डेयरी के चेयरमैन चुनाव में भाजपा ने नितिन सांगवान को प्रत्याशी बनाकर चौंकाया था।
मेयर पद के संभावित दावेदारों की ओर से अंदरखाने लॉबिंग भी शुरू होने की चर्चा है। कई नेता अपने-अपने स्तर पर पार्टी नेतृत्व तक पहुंच बनाने में जुटे हैं। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार केवल लॉबिंग के आधार पर टिकट मिलना आसान नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व पार्षदों की संख्या, जीतने की संभावना, आपसी स्वीकार्यता और मेयर चुनाव के बाद बनने वाले समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला कर सकता है।
अलवर में मेयर पद पर इस बार सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि टिकट किसे मिलेगा, बल्कि यह भी है कि क्या भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने स्थापित दावेदारों को दरकिनार कर कोई ऐसा नया नाम सामने लाएंगी, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की हो? राजनीतिक https://x.com/rpbreakingnews/status/2092217310484599170?s=20गलियारों में फिलहाल इसी संभावित सरप्राइज को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है।