
representative picture (AI)
सड़क हादसे में घायल व्यक्ति के लिए अस्पताल तक पहुंचने का समय कई बार जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन जाता है। इसी चुनौती को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एंबुलेंस की सुविधाओं और मानकों में बड़ा बदलाव किया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने नए मानकीकरण जारी किए हैं, जिसके तहत अब एंबुलेंस मिनी आइसीयू की तरह काम करेगी। इनमें वेंटिलेटर और जीवनरक्षक दवाओं जैसी सुविधाएं मौजूद रहेंगी और दुर्घटनास्थल पर ही त्वरित इलाज मिल सकेगा।
नए मानकों के तहत एंबुलेंस में इमरजेंसी चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती रहेगी। इसमें 1033 नंबर पर हादसे की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचकर मरीज को प्राथमिक उपचार देगी। मानकों के अनुसार एंबुलेंस के अंदर का ढांचा भी पूरी तरह बदला जाएगा। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी), ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, ईसीजी मशीन, मल्टी-पैरा मॉनिटर और पोर्टेबल सक्शन मशीन जैसे आधुनिक उपकरण अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। ऐसी सुविधाएं विदेशों में मिलती हैं।
नए सिस्टम में जीपीएस और जीआइएस ट्रैकिंग के जरिए एंबुलेंस को कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जा रहा है। इससे एंबुलेंस की लोकेशन की निगरानी हो सकेगी। कंट्रोल सेंटर रियल टाइम में वाहन की स्पीड और रूट को ट्रैक करेगा। नए सिस्टम में जीपीएस और जीआइएस ट्रैकिंग से समय की बर्बादी रुकेगी। सभी एंबुलेंस को कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से लाइव जीपीएस-जीआइएस ट्रैकिंग के जरिए जोड़ा जाएगा। कंट्रोल सेंटर रियल टाइम में वाहन की स्पीड और रूट को ट्रैक करेगा। इससे मरीज तक मदद तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।
एंबुलेंस में तैनात प्रशिक्षित स्टाफ हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचेगा और मरीज को प्राथमिक उपचार देगा। जीवन रक्षक उपकरण और दवाएं उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने से पहले ही जरूरी चिकित्सा सहायता दी जा सकेगी। इससे सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
हाईवे पर तैनात एंबुलेंस आधुनिक एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस होंगी। इनका प्राथमिक उद्देश्य घायल को अस्पताल पहुंचाने से पहले मौके पर ही आइसीयू जैसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और जान बचाना है। एंबुलेंस में कार्डियक अरेस्ट, रक्तस्राव और ट्रॉमा जैसी गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण और जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
अलवर में समस्या बहुत ज्यादा
अलवर जिले के पिनान क्षेत्र से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सर्वाधिक दुर्घटनाएं होती हैं। यहां ट्रॉमा की सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर घायलों को अलवर लाया जाता है, लेकिन इसमें समय बहुत ज्यादा लगता है। यहां तैनात एम्बुलेंस में इस तरह की सुविधाओं का अभाव है।
Updated on:
26 Aug 2026 11:43 am
Published on:
26 Aug 2026 11:43 am
